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#बलिदान दिवस #शहीद दिवस #🇮🇳 देशभक्ति #आज जिनकी पुण्यतिथि है #इतिहास स्मृति
बलिदान दिवस - ८ मार्च 1 ५३५ भारत के इतिहास का अविस्मरणीय क्षण, चित्तौड़ का दूसरा जौहर, रानी कर्मवती (कर्णावती)ने अपनी१ 3 हजार सखियों संग अपने को होम दिया था। इतिहास बताता है कि रानी कर्णावती ने हुमायूँ को राखी भेज कर अपना राखीबंध भाई बनाया था और वह सेना लेकर रवाना भी हुआ, परन्तु उसके पहुंचने से पहले ही बहादुर शाह ने चित्तौड़ पर अधिकार कर लिया था और राखीबंध बहिन जौहर कर थीं। चुकी आश्चर्य होता है यह पढकर कि उसी हुमायूँ के बेटे पर अकबर ने कर्णावती के ही बेटे राणा उदयसिंह पर चढाई कर चित्तौड़ पर आधिपत्य स्थापित किया।हमारी संस्कृति में राखीबंध बहिन का महत्व सगी बहन से कहीं कम नहीं है। इसी बहादुरशाह को चित्तौड ने कभी शरण दी थी चित्तौड़ का दूसरा जौहर ८ मार्च 1 ५३५ भारत के इतिहास का अविस्मरणीय क्षण, चित्तौड़ का दूसरा जौहर, रानी कर्मवती (कर्णावती)ने अपनी१ 3 हजार सखियों संग अपने को होम दिया था। इतिहास बताता है कि रानी कर्णावती ने हुमायूँ को राखी भेज कर अपना राखीबंध भाई बनाया था और वह सेना लेकर रवाना भी हुआ, परन्तु उसके पहुंचने से पहले ही बहादुर शाह ने चित्तौड़ पर अधिकार कर लिया था और राखीबंध बहिन जौहर कर थीं। चुकी आश्चर्य होता है यह पढकर कि उसी हुमायूँ के बेटे पर अकबर ने कर्णावती के ही बेटे राणा उदयसिंह पर चढाई कर चित्तौड़ पर आधिपत्य स्थापित किया।हमारी संस्कृति में राखीबंध बहिन का महत्व सगी बहन से कहीं कम नहीं है। इसी बहादुरशाह को चित्तौड ने कभी शरण दी थी चित्तौड़ का दूसरा जौहर - ShareChat