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।। ॐ ।। यत्र काले त्वनावृत्तिमावृत्तिं चैव योगिनः। प्रयाता यान्ति तं कालं वक्ष्यामि भरतर्षभ॥ हे अर्जुन ! जिस काल में शरीर त्यागकर गये हुए योगीजन पुनर्जन्म को नहीं पाते और जिस काल में शरीर त्यागने पर पुनर्जन्म पाते हैं, मैं अब उस काल का वर्णन करता हूँ। #यथार्थ गीता #❤️जीवन की सीख #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
यथार्थ गीता - ।। ऊँ ।। यत्र काले त्वनावृत्तिमावृत्तिं चैव ufT:l प्रयाता यान्ति तं कालं वक्ष्यामि भरतर्षभ।। जिस काल में शरीर हे अर्जुन त्यागकर गये हुए योगीजन पुनर्जन्म को नहीं पाते और जिस काल में शरीर त्यागने पर पुनर्जन्म पाते हैं, मैं अब उस काल का वर्णन करता हूँ। {495ು43521 அவகிரை ।। ऊँ ।। यत्र काले त्वनावृत्तिमावृत्तिं चैव ufT:l प्रयाता यान्ति तं कालं वक्ष्यामि भरतर्षभ।। जिस काल में शरीर हे अर्जुन त्यागकर गये हुए योगीजन पुनर्जन्म को नहीं पाते और जिस काल में शरीर त्यागने पर पुनर्जन्म पाते हैं, मैं अब उस काल का वर्णन करता हूँ। {495ು43521 அவகிரை - ShareChat