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#ज्ञानीजन
ज्ञानीजन - ज्ञान के आतंक में मेरे घर का अन्धेरा बाहर निकलने से डरता है ज्ञानीजन हँसते हैं बन्द खिड़कियाँ देखकर उधड़े पलस्तर पर बने भुतैले चेहरों पर अकारण और सीलन से बजबजाती सीढ़ियों की रपटन पर ज्ञान के साथ जिनके पास आई है अकूत सम्पदा और जो कृपण हैं मुझ जैसे दूसरों पर दृष्टिपात करने तक वे अब दर्प से मारते हैं लात मेरे जंग खाए गिराऊ दरवाज़े पर तुम गधे के गधे ही रहे जिस तरह कपड़े के जूतों और नीले बन्द गले के रुई भरे कोटों में माओ के अनुयायी... सर्वज्ञ, अगुआ ज्ञान भण्डार के भट्टारक, महा-प्रज्ञ करते ैंः कताश्ष ज्ञान के आतंक में मेरे घर का अन्धेरा बाहर निकलने से डरता है ज्ञानीजन हँसते हैं बन्द खिड़कियाँ देखकर उधड़े पलस्तर पर बने भुतैले चेहरों पर अकारण और सीलन से बजबजाती सीढ़ियों की रपटन पर ज्ञान के साथ जिनके पास आई है अकूत सम्पदा और जो कृपण हैं मुझ जैसे दूसरों पर दृष्टिपात करने तक वे अब दर्प से मारते हैं लात मेरे जंग खाए गिराऊ दरवाज़े पर तुम गधे के गधे ही रहे जिस तरह कपड़े के जूतों और नीले बन्द गले के रुई भरे कोटों में माओ के अनुयायी... सर्वज्ञ, अगुआ ज्ञान भण्डार के भट्टारक, महा-प्रज्ञ करते ैंः कताश्ष - ShareChat