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#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - होते हुए भी, कभी कभी॰ Hq$ कितने अकेले रह जाते हैं हम, कहने को मन में है कितना कुछ. फिर भी इतने खामोश रह जाते हैं हम, भर जाती हैं जब जब आँखें तो अपनी नजरें ೯೯, चुराते दिल में अपना दर्द छुपा कर. ೬೦೦ಲ मुस्कुराते हैं हम।। अक्सर ही होते हुए भी, कभी कभी॰ Hq$ कितने अकेले रह जाते हैं हम, कहने को मन में है कितना कुछ. फिर भी इतने खामोश रह जाते हैं हम, भर जाती हैं जब जब आँखें तो अपनी नजरें ೯೯, चुराते दिल में अपना दर्द छुपा कर. ೬೦೦ಲ मुस्कुराते हैं हम।। अक्सर ही - ShareChat