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।। ॐ।। यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता। योगिनो यतचित्तस्य युञ्जतो योगमात्मनः।। #यथार्थ गीता #❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 जिस प्रकार वायुरहित स्थान में रखा गया दीपक चलायमान नहीं होता, लौ सीधे ऊपर जाती है, उसमें कम्पन नहीं होता, यही उपमा परमात्मा के ध्यान में लगे हुए योगी के जीते हुए चित्त की दी गयी है। दीपक तो उदाहरण मात्र है। आजकल दीपक का प्रचलन शिथिल पड़ रहा है। अगरबत्ती ही जलाने पर धुआँ सीधे ऊपर जाता है, यदि वायु में वेग न हो। यह योगी के जीते हुए चित्त का एक उदाहरण मात्र है। अभी चित्त भले ही जीता गया है, निरोध हो गया है; किन्तु अभी चित्त है। जब निरुद्ध चित्त का भी विलय हो जाता है, तब कौन-सी विभूति मिलती है? देखें-"यथार्थगीता"
यथार्थ गीता - 133 दीपक तो उदाहरण मात्र है। यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा आजकल दीपक का प्रचलन योगिनो यतमचवतत्तस्य शिथिल पड़ रहा है। अगरबत्ती ही युञ्जतो धुआँ सीधे ऊपर जाता जलाने पर பUHIIFBI है, यदि वायु में वेग न हो। यह योगी के जीते हुए चित्त का एक उदाहरण वायुरहित स्थान में रखा  जिस प्रकार मात्र है। अभी चित्त भले ही जीता गया दीपक चलायमान नहींहोता लौ सीथे ऊपर जाती है॰ उसमें कम्पन नहीं fa गया है, निरोध हो गया है; होता , यही उपमा परमात्माकिथ्यानानों निरुद्ध अभी चित्त है। जब चित्त का लगे हुए योगी के जीते हुएचित्तकीदी भी विलय हो जाता है, तब कौननसी eழcen - गयी है। विभूति मिलती है? देखें " यथार्थगीता " 133 दीपक तो उदाहरण मात्र है। यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा आजकल दीपक का प्रचलन योगिनो यतमचवतत्तस्य शिथिल पड़ रहा है। अगरबत्ती ही युञ्जतो धुआँ सीधे ऊपर जाता जलाने पर பUHIIFBI है, यदि वायु में वेग न हो। यह योगी के जीते हुए चित्त का एक उदाहरण वायुरहित स्थान में रखा  जिस प्रकार मात्र है। अभी चित्त भले ही जीता गया दीपक चलायमान नहींहोता लौ सीथे ऊपर जाती है॰ उसमें कम्पन नहीं fa गया है, निरोध हो गया है; होता , यही उपमा परमात्माकिथ्यानानों निरुद्ध अभी चित्त है। जब चित्त का लगे हुए योगी के जीते हुएचित्तकीदी भी विलय हो जाता है, तब कौननसी eழcen - गयी है। विभूति मिलती है? देखें " यथार्थगीता " - ShareChat