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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - खथीकी 7[[E3 कि समझें हमारा कैसे Ha8 मन डॉ॰ रितु पाण्डेय शर्मा, reetupost@yahoo com  हम सोचते कैसे हैं ? सामान्यतः हम विचारों की धारा में बहते हैं पर उन पर ठहरकर दृष्टि नहीं डालते।  भीतर अपने उठते विचारों भावनाओं, प्रतिक्रियाओं को सजगता से देख पाना मेटाकॉग्निशन कहलाता है। यह हमारे निर्णयों को स्पष्ट , संतुलित और विवेकपूर्ण बनाता है, बशर्ते में कुछ हम दिन समय साक्षी भाव का अभ्यास करें। मेटाकॉग्निशन पर हुए कुछ अध्ययनों से स्पष्ट होता है कि जिन व्यक्तियों में ऐसी मानसिक जागरूकता अधिक होती है, वे न केवल बेहतर ढंग से सीखते हैं॰ बल्कि समस्याओं का समाधान भी अधिक आत्मविश्वास से कर पाते हैं। शोध यह भी संकेत देते हैं कि यह जागरूकता तनाव को घटाती है और हमारे जीवन ्लक्ष्यों को स्पष्ट करती है। साक्षी भाव वह अवस्था है, जिसमें व्यक्ति अपने मन को नियंत्रित करने के बजाय उसे समझने का प्रयास करता है- एक शांत दर्शक की तरह। अपने मन को देखने में आत्म- उत्थान का बीज निहित है। यह तभी संभव है जब व्यक्त समझने लगे कि उसका मन कैसे सोचता है, किस प्रकार यह प्रतिक्रिया करता है और कब भटक जाता है। ये अभ्यास वास्तव में मस्तिष्क को प्रशिक्षित करते हे।ये हमें अपने विचारों को पहचानने , उनसे अनावश्यक रूप से उलझने से बचने और जीवन में अधिक सजगः संतुलित विवेकपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करते हे। 74[ मिनट रीड 46 खथीकी 7[[E3 कि समझें हमारा कैसे Ha8 मन डॉ॰ रितु पाण्डेय शर्मा, reetupost@yahoo com  हम सोचते कैसे हैं ? सामान्यतः हम विचारों की धारा में बहते हैं पर उन पर ठहरकर दृष्टि नहीं डालते।  भीतर अपने उठते विचारों भावनाओं, प्रतिक्रियाओं को सजगता से देख पाना मेटाकॉग्निशन कहलाता है। यह हमारे निर्णयों को स्पष्ट , संतुलित और विवेकपूर्ण बनाता है, बशर्ते में कुछ हम दिन समय साक्षी भाव का अभ्यास करें। मेटाकॉग्निशन पर हुए कुछ अध्ययनों से स्पष्ट होता है कि जिन व्यक्तियों में ऐसी मानसिक जागरूकता अधिक होती है, वे न केवल बेहतर ढंग से सीखते हैं॰ बल्कि समस्याओं का समाधान भी अधिक आत्मविश्वास से कर पाते हैं। शोध यह भी संकेत देते हैं कि यह जागरूकता तनाव को घटाती है और हमारे जीवन ्लक्ष्यों को स्पष्ट करती है। साक्षी भाव वह अवस्था है, जिसमें व्यक्ति अपने मन को नियंत्रित करने के बजाय उसे समझने का प्रयास करता है- एक शांत दर्शक की तरह। अपने मन को देखने में आत्म- उत्थान का बीज निहित है। यह तभी संभव है जब व्यक्त समझने लगे कि उसका मन कैसे सोचता है, किस प्रकार यह प्रतिक्रिया करता है और कब भटक जाता है। ये अभ्यास वास्तव में मस्तिष्क को प्रशिक्षित करते हे।ये हमें अपने विचारों को पहचानने , उनसे अनावश्यक रूप से उलझने से बचने और जीवन में अधिक सजगः संतुलित विवेकपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करते हे। 74[ मिनट रीड 46 - ShareChat