ShareChat
click to see wallet page
search
#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - बेगाने होते लोग देखे, अजनबी होता शहर देखा हर इंसान को यहाँ, मैंने खुद से ही बेखबर देखा। रोते हुए  नयन देखे, 17 मुस्कुराता हुआ अधर देखा गैरों के हाथों में मरहम, में खंजर देखा | अपनों के মাথী मत पूछ इस जिँदगी में , इन आँखों ने क्या मंजर देखा मैंने हर इंसान को यहाँ, खुद से ही बेखबर देखा। H बेगाने होते लोग देखे, अजनबी होता शहर देखा हर इंसान को यहाँ, मैंने खुद से ही बेखबर देखा। रोते हुए  नयन देखे, 17 मुस्कुराता हुआ अधर देखा गैरों के हाथों में मरहम, में खंजर देखा | अपनों के মাথী मत पूछ इस जिँदगी में , इन आँखों ने क्या मंजर देखा मैंने हर इंसान को यहाँ, खुद से ही बेखबर देखा। H - ShareChat