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इसकदर दिल से टूटकर
हरदम हो जो इंतजार करे,
कोई तो है जो गहराई में
डूबकर भी यूँ प्यार करे।
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सितमगर कायनात में
दिल के चोर बहुत हैं,
हुस्न माफ करे अब
खुद पे मेरा जोर नही है।
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बस शौख था सीखने का
कुछ इस कदर जनाब,
फिर शुरू किया इश्क
और सीखता ही रह गया।
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ये दिल लगने के बहाने हजार,
और न लगने के सिर्फ तुम हो!
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बस दो शब्द ही दिल पे हुए कुछ ऐसे,
मुस्कुराते लबों के हम तलबगार हो गए।
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बंद आँखों में भी अगर
जो याद आए कोई,
टटोलिये अंदर दिल मे
कोई बेहिसाब जिंदा है।
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यूँ सिखा दिया दिल को मुहब्बत तुमने,
ये जब भी करेगा लाजवाब करेगा!!🍇
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खामोश धूनों पे जो
सम्भलने का भी होश ना दे,
खुली जुल्फें झुकी नजरें
कोई दिल को भी दोष ना दे।
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नजर हर चीज पे आखिर क्या बात है?
बदमाश दिल है या बेपनाह जज्बात है!
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इस कदर भी क्या जरूरत थी,
सबके दिल में आग लगाने की।
एक तीर कितने निशाने.......
जालिम सबको ही तड़पाने की।।💕💞
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................✍रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳
#💝 शायराना इश्क़ #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #🌹प्यार के नगमे💖 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️


