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#पूजन विधि
पूजन विधि - देवी कालरात्रि प्रिय पुष्प যন ব্রী যানী मन्त्र देवी कालरात्र्यै नमः Il সাথনা एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी Il वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रि्भयङ्करी II सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता या देवी नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।I ಲ करालवन्दना घोरां मुक्तकेशी चतुर्भुजाम् कालरात्रिम् करालिंका दिव्याम् विद्युतमाला विभूषिताम् दिव्यम् लौहवज्र खड्ग वामोघोर्ध्व कराम्बुजाम् अभयम् वरदाम् चैव दक्षिणोध्वाघः पार्णिकाम् मम् II महामेघ प्रभाम् श्यामाम् तक्षा चैव गर्दभारूढ़ा घोरदंश कारालास्यां पीनोन्नत पयोधराम् । सरोरूहाम्। सुख पप्रसन्न वदना स्मेरान्न एवम् सचियन्तयेत् कालरात्रिम् सर्वकाम् समृध्दिदाम् মীপ कालरात्रि श्रीं कराली च क्लीं कल्याणी कलावती कालमाता कलिदर्पध्नी कमदीश कुपान्विता कामबीजजपान्दा कमबीजस्वरूपिणी कुमतिघ्नी कुलीनर्तिनाशिनी कुल कामिनी क्लीं ह्रीं श्रीं मन्त्र्वर्णेन कालकण्टकघातिनी कृपामयी कृपाधारा कृपापारा कृपागमा कवच क्लीं मे हृदयम् पातु पादौ श्रीकालरात्रि 30 ललाटे सततम् पातु तुष्टग्रह निवारिणी II रसनाम् पातु कौमारी , भैरवी  चक्षुषोर्भम कटौ पृष्ठे महेशानी, कर्णोशङ्करभामिनी वर्जितानी तु स्थानाभि यानि च कवचेन हि तानि सर्वाणि मे देवीसततंपातु स्तम्भिनी II आरती के मुँह से बचाने वाली कालरात्रि जय जय महाकाली কাল महाचण्डी तेरा अवतारा दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा और आकाश पे सारा महाकाली है तेरा पसारा पृथ्वी खड्ग खप्पर रखने वाली दुष्टों का लहू चखने वाली II देखूँ तेरा नजारा कलकत्ता स्थान तुम्हारा सब जगह गावें स्तुति सभी तुम्हारी II  सभी देवता सब नर-्नारी कृपा करे तो कोई भी दुःख ना Il ান্বপূতা  रक्तदन्ता और ना कोई चिन्ता रहे ना बीमारी ना कोई गम ना संकट भारी Il সঙ্কাক্কালী সাঁ নিষ নমান Il उस पर कभी कष्ट ना आवे प्रेम से कह कालरात्रि माँ तेरी जय ।l तू भी भक्त देवी कालरात्रि प्रिय पुष्प যন ব্রী যানী मन्त्र देवी कालरात्र्यै नमः Il সাথনা एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी Il वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रि्भयङ्करी II सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता या देवी नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।I ಲ करालवन्दना घोरां मुक्तकेशी चतुर्भुजाम् कालरात्रिम् करालिंका दिव्याम् विद्युतमाला विभूषिताम् दिव्यम् लौहवज्र खड्ग वामोघोर्ध्व कराम्बुजाम् अभयम् वरदाम् चैव दक्षिणोध्वाघः पार्णिकाम् मम् II महामेघ प्रभाम् श्यामाम् तक्षा चैव गर्दभारूढ़ा घोरदंश कारालास्यां पीनोन्नत पयोधराम् । सरोरूहाम्। सुख पप्रसन्न वदना स्मेरान्न एवम् सचियन्तयेत् कालरात्रिम् सर्वकाम् समृध्दिदाम् মীপ कालरात्रि श्रीं कराली च क्लीं कल्याणी कलावती कालमाता कलिदर्पध्नी कमदीश कुपान्विता कामबीजजपान्दा कमबीजस्वरूपिणी कुमतिघ्नी कुलीनर्तिनाशिनी कुल कामिनी क्लीं ह्रीं श्रीं मन्त्र्वर्णेन कालकण्टकघातिनी कृपामयी कृपाधारा कृपापारा कृपागमा कवच क्लीं मे हृदयम् पातु पादौ श्रीकालरात्रि 30 ललाटे सततम् पातु तुष्टग्रह निवारिणी II रसनाम् पातु कौमारी , भैरवी  चक्षुषोर्भम कटौ पृष्ठे महेशानी, कर्णोशङ्करभामिनी वर्जितानी तु स्थानाभि यानि च कवचेन हि तानि सर्वाणि मे देवीसततंपातु स्तम्भिनी II आरती के मुँह से बचाने वाली कालरात्रि जय जय महाकाली কাল महाचण्डी तेरा अवतारा दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा और आकाश पे सारा महाकाली है तेरा पसारा पृथ्वी खड्ग खप्पर रखने वाली दुष्टों का लहू चखने वाली II देखूँ तेरा नजारा कलकत्ता स्थान तुम्हारा सब जगह गावें स्तुति सभी तुम्हारी II  सभी देवता सब नर-्नारी कृपा करे तो कोई भी दुःख ना Il ান্বপূতা  रक्तदन्ता और ना कोई चिन्ता रहे ना बीमारी ना कोई गम ना संकट भारी Il সঙ্কাক্কালী সাঁ নিষ নমান Il उस पर कभी कष्ट ना आवे प्रेम से कह कालरात्रि माँ तेरी जय ।l तू भी भक्त - ShareChat