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##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - (nn ' آ { 9 F ఫ్ే awgp awgp wa ovnomio Oyde युग निर्माण सत्संकल्प (गुरुदेव पण्डित श्रीराम  आचाय থল . द्वारा कृत स्म ईभर को सवव्यापी, न्यायकारी मानकर मनुष्य चे मूल्यांकन की कसाटी उसकी  सफलताओं , योग्यताओं एवं चिभूतियों को नही अपने जीवन नें उतारेंगे | उसके अनुशासन उसके सदचिचारों ओर सत्कर्मों को सानेंगे ।  शरीर को भगवान का मन्दिर रमसकर आर नियमितता घ्वारा आरोग्य की॰ के राथ चर व्यवसार करेंगे , 757/ ~ रर्मे अपने लिये पसल्द नहों। रदा करग ।  लान को कुचिचारों और दुर्भाबनाओं से यचारो " नर ्तारी परस्पर पवित्र दृष्टि रखोगे ।  रहाने +लिय स्याध्याय एप চী যখা YTra सत्प्वृत्तियों के पुण्य प्रसार के सिये ससार मे रख्े रहेंगे ] पुरुणार्य एयं पन का  अपने समय , पभाव सान  इच्यिय संयम , अर्य संयम  नियमित रूप नगाते टहेंगे। सयम आर एफ अश ] Dyn चिचार सयम का सतत अभ्यास करंग । परम्पराओं फो तुलना मॅ नियफ को मरत्व देगे ।  एफ अभिन् अंचा  34ন 314ণ] মমাত अनीति से लोहा लेने  सप्ानो को संगठित करने मानेंगे आर सयके हित अपना हित समदोगे | ओर नवसृजन की गतिविधियों में पूरी रुचि लेंगे ।  সতাভাসা কা মালযা বললাসা ম বরবয়া  राष्टीय एफता एगं समता फे प्रति निष्ठाचान तार्गरक कत्तव्या का पालन झरगे आर रहेगे | जाति, लिंग , भापा, प्ान्त आदि 1 समाजनिष्ठ यने रहेगे । का३ सदभाव  বরমনবা ]      समझदारी , इनानदारी , जिम्मेदारी ओर बलादुरी  मनुष्य अपने भाग्य का निमाता आप ४ह॰ इस अिच्म्ित्न अंग माजेंगे | 514 বিম্াম Fa 7 आाघार पर लमारी मान्यता ह चारा ओर मपरता, स्यणताः सारगी एय उत्कृष्ट यनंगे ओर फो श्रेष्ठ यनायग . तो দুমেয  सघनता का चातायरण उत्पत्न करेंगे । युग अयश्य यदतगा |  अनोति से प्राप्त सफलता की अपेदाा नीति पर 44 da युग चदलेगा  चलते एुए असफलता को शिरोघार्य करेंगे  सुपरेंगे " 7 ஏப परिपूर्ण चिश्ास ढ। --   0 शान्तिकुञ्ज , हरिद्वार (nn ' آ { 9 F ఫ్ే awgp awgp wa ovnomio Oyde युग निर्माण सत्संकल्प (गुरुदेव पण्डित श्रीराम  आचाय থল . द्वारा कृत स्म ईभर को सवव्यापी, न्यायकारी मानकर मनुष्य चे मूल्यांकन की कसाटी उसकी  सफलताओं , योग्यताओं एवं चिभूतियों को नही अपने जीवन नें उतारेंगे | उसके अनुशासन उसके सदचिचारों ओर सत्कर्मों को सानेंगे ।  शरीर को भगवान का मन्दिर रमसकर आर नियमितता घ्वारा आरोग्य की॰ के राथ चर व्यवसार करेंगे , 757/ ~ रर्मे अपने लिये पसल्द नहों। रदा करग ।  लान को कुचिचारों और दुर्भाबनाओं से यचारो " नर ्तारी परस्पर पवित्र दृष्टि रखोगे ।  रहाने +लिय स्याध्याय एप চী যখা YTra सत्प्वृत्तियों के पुण्य प्रसार के सिये ससार मे रख्े रहेंगे ] पुरुणार्य एयं पन का  अपने समय , पभाव सान  इच्यिय संयम , अर्य संयम  नियमित रूप नगाते टहेंगे। सयम आर एफ अश ] Dyn चिचार सयम का सतत अभ्यास करंग । परम्पराओं फो तुलना मॅ नियफ को मरत्व देगे ।  एफ अभिन् अंचा  34ন 314ণ] মমাত अनीति से लोहा लेने  सप्ानो को संगठित करने मानेंगे आर सयके हित अपना हित समदोगे | ओर नवसृजन की गतिविधियों में पूरी रुचि लेंगे ।  সতাভাসা কা মালযা বললাসা ম বরবয়া  राष्टीय एफता एगं समता फे प्रति निष्ठाचान तार्गरक कत्तव्या का पालन झरगे आर रहेगे | जाति, लिंग , भापा, प्ान्त आदि 1 समाजनिष्ठ यने रहेगे । का३ सदभाव  বরমনবা ]      समझदारी , इनानदारी , जिम्मेदारी ओर बलादुरी  मनुष्य अपने भाग्य का निमाता आप ४ह॰ इस अिच्म्ित्न अंग माजेंगे | 514 বিম্াম Fa 7 आाघार पर लमारी मान्यता ह चारा ओर मपरता, स्यणताः सारगी एय उत्कृष्ट यनंगे ओर फो श्रेष्ठ यनायग . तो দুমেয  सघनता का चातायरण उत्पत्न करेंगे । युग अयश्य यदतगा |  अनोति से प्राप्त सफलता की अपेदाा नीति पर 44 da युग चदलेगा  चलते एुए असफलता को शिरोघार्य करेंगे  सुपरेंगे " 7 ஏப परिपूर्ण चिश्ास ढ। --   0 शान्तिकुञ्ज , हरिद्वार - ShareChat