प्रेम सिखावत है बरसा #राधे कृष्ण नो।
प्रेम रूप छवि बसैं निरंतर,
प्रेम सदा हिय उपजानौ।।
प्रेम रूप विहरै दोऊ गहवर,
एक प्रेम कौ यही ठिकानौ।
प्रेम विलोकत प्रेम छकैं नित,
प्रेम सदा रस केलि लुटानौं।।
प्रेम भूमि दोऊ प्रेम खिलौना,
प्रेम खेल खेलत मन मानौं।
कहैं माधव प्रभु रूप अलि सों,
प्रेम सदा प्रेमिंन पहचानौं ।।
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