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चाणक्य - 18 Iశ नास्ति मिघसर्मं ती्य नास्तिचात्मसर्म बलम्। नास्ति चक्षुसमं तेजो नास्ति चान्नसर्म प्रियमु। अर्थात बादल के समान कोई जल नहीं होता अपने बल के समान कोई बल नहीं होता आँखों के समान कोई ज्योति नहीं होती और अन्न के समान कोई प्रिय वस्तु नहीं होती चाणक्य नीति गौरव शर्मा NSUI DENTS 9 वार्पकर्त दिमन ०७ गुला गध् ग्र्ेश VIONI | 18 Iశ नास्ति मिघसर्मं ती्य नास्तिचात्मसर्म बलम्। नास्ति चक्षुसमं तेजो नास्ति चान्नसर्म प्रियमु। अर्थात बादल के समान कोई जल नहीं होता अपने बल के समान कोई बल नहीं होता आँखों के समान कोई ज्योति नहीं होती और अन्न के समान कोई प्रिय वस्तु नहीं होती चाणक्य नीति गौरव शर्मा NSUI DENTS 9 वार्पकर्त दिमन ०७ गुला गध् ग्र्ेश VIONI | - ShareChat