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#✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 - भौमभावफल के अनुसार , चन्द्रमा और मंगल की स्थिति व्यक्ति के जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के माध्यम से इसे समझते हैंः *द्वादश भाव में चन्द्रमा* "पितृव्यादिमात्रादितोडन्तविषादो न चाप्नोति कामं प्रियाल्पप्रियत्वम्।।"  में चन्द्रमा होने से व्यक्ति को शत्रुओं के अर्थः द्वादश भाव भय के कारण चिन्ता बनी रहती है, नेत्र आदि विकार्रों से विशेष चिन्ता रहती है, विवाह आदि मंगल कार्यों में द्रव्य होता है। उसे चचा , ताऊ, पिता, भ्राता , पुत्र, और माता व्यय थोड़ा के कुल आदि से चित्त में दुःख बना रहता है। इनसे " स्नेह होता है, और वांछित फल नहीं मिलता। *লনন ম মঁাল*  "विलग्ने कुजे दण्डलोहाग्निभीति स्तपेन्मानसं केसरी किं द्वितीयः| कलत्रादिघातः शिरोनेत्रपीडा विपाके फलानां सदेवोपसर्गः/ ।" अर्थः लग्न में मंगल होने से व्यक्ति को दंड (लाठी), लोहा, अग्नि से भय होता है, स्त्री॰ पुत्र आदि के नष्ट होने से कष्ट होता है, शिर और नेत्र में पीड़ा होती है, और अपने किये कार्य के सिद्ध होने में सदैव विघ्न होता है। भौमभावफल के अनुसार , चन्द्रमा और मंगल की स्थिति व्यक्ति के जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। आइए, श्लोकों के माध्यम से इसे समझते हैंः *द्वादश भाव में चन्द्रमा* "पितृव्यादिमात्रादितोडन्तविषादो न चाप्नोति कामं प्रियाल्पप्रियत्वम्।।"  में चन्द्रमा होने से व्यक्ति को शत्रुओं के अर्थः द्वादश भाव भय के कारण चिन्ता बनी रहती है, नेत्र आदि विकार्रों से विशेष चिन्ता रहती है, विवाह आदि मंगल कार्यों में द्रव्य होता है। उसे चचा , ताऊ, पिता, भ्राता , पुत्र, और माता व्यय थोड़ा के कुल आदि से चित्त में दुःख बना रहता है। इनसे " स्नेह होता है, और वांछित फल नहीं मिलता। *লনন ম মঁাল*  "विलग्ने कुजे दण्डलोहाग्निभीति स्तपेन्मानसं केसरी किं द्वितीयः| कलत्रादिघातः शिरोनेत्रपीडा विपाके फलानां सदेवोपसर्गः/ ।" अर्थः लग्न में मंगल होने से व्यक्ति को दंड (लाठी), लोहा, अग्नि से भय होता है, स्त्री॰ पुत्र आदि के नष्ट होने से कष्ट होता है, शिर और नेत्र में पीड़ा होती है, और अपने किये कार्य के सिद्ध होने में सदैव विघ्न होता है। - ShareChat