#राधे कृष्ण
श्रीकृष्ण का अवतार मानव इतिहास के सबसे महान और दिव्य अवतारों में से एक माना जाता है। वे भगवान विष्णु के आठवें अवतार थे, जिन्होंने धर्म की स्थापना, अधर्म का नाश और मानवता को सत्य, प्रेम, और कर्तव्य का संदेश देने के लिए पृथ्वी पर अवतार लिया था।
🌸 श्रीकृष्ण के अवतार का मुख्य उद्देश्य
1. धर्म की पुनर्स्थापना (धर्म की रक्षा करना)
भगवान विष्णु ने स्वयं भगवद्गीता में कहा है —
> “यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत,
अभ्युत्थानम् अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।”
— (गीता 4.7)
अर्थात् — जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं स्वयं अवतार लेकर आता हूँ।
कृष्ण ने अन्याय, अत्याचार और पाप की वृद्धि के समय जन्म लेकर धर्म की स्थापना की।
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2. अधर्म और अत्याचार का नाश करना
कृष्ण का अवतार मुख्य रूप से कंस, शिशुपाल, जरासंध, कौरवों जैसे अत्याचारी और दुष्ट शक्तियों के विनाश के लिए हुआ।
उन्होंने बताया कि जब अन्याय बढ़ जाए तो मौन रहना भी अधर्म है, इसलिए धर्म की रक्षा हेतु युद्ध भी आवश्यक है।
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3. मानव को कर्म का महत्व सिखाना
कृष्ण ने अर्जुन को गीता के माध्यम से बताया कि —
> “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।”
अर्थात् मनुष्य को अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए, फल की चिंता नहीं करनी चाहिए।
यह शिक्षा पूरे मानव समाज के लिए एक आदर्श जीवन दर्शन बन गई।
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4. भक्ति, प्रेम और योग का मार्ग दिखाना
कृष्ण ने लोगों को सिखाया कि भगवान तक पहुँचने के कई मार्ग हैं —
भक्ति योग (प्रेम और समर्पण का मार्ग)
कर्म योग (कर्तव्य पालन का मार्ग)
ज्ञान योग (सत्य का बोध)
वे स्वयं गोपियों, मीरा और भक्तों के आदर्श आराध्य बने।
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5. निष्काम कर्म और जीवन का आदर्श प्रस्तुत करना
कृष्ण ने जीवन के हर क्षेत्र में यह बताया कि कर्तव्य करते हुए भी मन को भगवान में लगाना ही सच्चा योग है।
उन्होंने गृहस्थ, मित्र, दूत, सारथी और भगवान — सभी रूपों में आदर्श प्रस्तुत किया।
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6. अर्जुन को कर्तव्य बोध कराना (गीता का उपदेश)
महाभारत के युद्ध में जब अर्जुन मोह में पड़ गए, तब श्रीकृष्ण ने उन्हें भगवद्गीता का उपदेश दिया —
यह उपदेश केवल अर्जुन के लिए नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानव जाति के लिए एक आध्यात्मिक मार्गदर्शन है।
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7. सत्य, प्रेम और करुणा का प्रचार
कृष्ण ने यह सिखाया कि सच्चा धर्म केवल पूजा या कर्मकांड में नहीं, बल्कि सच्चाई, प्रेम, दया, क्षमा और सेवा में है।
उन्होंने समाज को जाति, भेदभाव और अंधविश्वास से ऊपर उठकर जीने की प्रेरणा दी।
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8. संसार को मोक्ष का मार्ग दिखाना
कृष्ण ने यह भी बताया कि जो व्यक्ति अपनी आत्मा को परमात्मा में समर्पित कर देता है, वह जन्म–मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है।
उनका जीवन भक्ति से मुक्ति तक की पूर्ण यात्रा है।
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🌼 संक्षेप में कहा जाए तो —
श्रीकृष्ण का अवतार इसलिए हुआ ताकि वे —
धर्म की स्थापना करें,
अधर्म का नाश करें,
मानव को कर्म, प्रेम और भक्ति का मार्ग दिखाएँ,
और मानवता को मोक्ष का सच्चा ज्ञान दें।


