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🌼 महाभारत का सबसे बड़ा 'अगर-मगर': कौरवों की हार का असली कारण! 🌼
🔥 दुर्योधन की मृत्युशय्या और श्रीकृष्ण का अंतिम सत्य 🔥
कुरुक्षेत्र के महायुद्ध की समाप्ति पर, जब दुर्योधन अपनी अंतिम सांसें गिन रहा था, तब भगवान श्रीकृष्ण उससे मिलने पहुंचे। वहां श्रीकृष्ण ने उस भीषण गलती का खुलासा किया, जिसके कारण कौरवों को पराजय का मुख देखना पड़ा।
श्रीकृष्ण ने बताया कि पांडव और उनकी सम्पूर्ण सेना केवल एक दिन में ही पराजित हो सकती थी!
⚔️ दुर्योधन की सबसे बड़ी भूल: 'सेनापति का चयन'
युद्ध के 16वें दिन, गुरु द्रोणाचार्य के वध के बाद दुर्योधन ने अपने परम मित्र कर्ण को सेनापति नियुक्त किया। श्रीकृष्ण के अनुसार, यही इस महायुद्ध का निर्णायक मोड़ था और दुर्योधन की सबसे भयंकर भूल।
"विनाश काले विपरीत बुद्धि"
मित्र-प्रेम में अंधे दुर्योधन ने यह अनदेखा कर दिया कि उसकी सेना में स्वयं महाकाल का अंश मौजूद था। यदि उसने कर्ण के स्थान पर अश्वत्थामा को सेनापति चुना होता, तो महाभारत का परिणाम कुछ और ही होता।
🔱 क्यों अजेय थे अश्वत्थामा?
1️⃣ शिव अवतार: अश्वत्थामा स्वयं महादेव शिव के रूद्र अवतार थे।
2️⃣ अमर और महाबली: वे अमर थे और उनमें अकेले एक समय में 72,000 योद्धाओं के छक्के छुड़ाने का सामर्थ्य था। कृपाचार्य से भी अधिक शक्तिशाली!
3️⃣ दिव्य ज्ञान: परशुराम, व्यास, भीष्म और द्रोण जैसे गुरुओं से शिक्षित अश्वत्थामा 64 कलाओं और 18 विद्याओं में पारंगत थे।
🌑 अठारहवें दिन का प्रमाण
इस सत्य का प्रमाण युद्ध के अंतिम (18वें) दिन की रात्रि को मिला। जब दुर्योधन ने अंततः अश्वत्थामा को सेनापति बनाया, तो उसने केवल एक ही रात में पांडवों की बची-खुची लाखों की सेना और द्रौपदी के पुत्रों का संहार कर दिया।
सोचिये! यदि यह निर्णय पहले लिया गया होता, तो शायद दुर्योधन को वह दर्दनाक मृत्यु न मिलती।
यह प्रसंग सिखाता है कि कभी-कभी अत्यधिक मोह भी हमारे विनाश का कारण बन जाता है।
जय श्री कृष्ण! 🙏🙏


