_*🌷 चिंतन🌷*_
_*जो इतराते रह गए अपनी चालाकियों पर, वो समझ ही नहीं पाए कि क्या गंवा बैठे। कहते हैं त्यौहार फीके हो गए हैं, सच तो ये है कि त्यौहार नहीं बल्कि हमारे व्यवहार फीके हो गए हैं। समय मिलने पर बात करने और समय निकाल कर बात करने में बड़ा अंतर होता है, इससे रिश्तों की गहराई समझ आती है।*_
_*आजकल Formality वाले रिश्तों की बोलबाला है। दिल से रिश्ते निभाने वालों की तादाद कम होती जा रही है। बाकी कई लोगों को दुःख की पूंजी पर सहानुभूति का ब्याज इकट्ठा करने की आदत होती है।*_
_*॥ जय श्री राधे कृष्ण ॥*_ #☝ मेरे विचार #📒 मेरी डायरी #👫 हमारी ज़िन्दगी #🙏सुविचार📿 #☝अनमोल ज्ञान

