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#GodMorningSaturday कबीर, गुरु सीढ़ी से उतरे, शब्द बिहूना होय। ताको काल घसीटही, राख सकै ना कोय।। भावार्थ :- गुरु से नाम दीक्षा लेकर जो मर्यादा तोड़ देता है, वह अगले जन्म में भैंस के काटड़े के रूप में जन्म लेगा। जो गुरु जी से आडा-टेढ़ा (अशब्द) बोलता है, वह पशु बनेगा। #santrampaljimaharaj
santrampaljimaharaj - कबीर, गुरु सीढ़ी से उतरे, शब्द बिहूना होय। ताको काल घसीटही, राख सकै ना कोय। | भावार्थ :- गुरु से नाम दीक्षा लेकर जो मर्यादा तोड़ देता है, वह अगले जन्म मैं भैंस के काटड़े के रूप में जन्म लेगा। जो गुरु जी से आडा-टेढ़ा (अशब्द) बौलता है, वह पशु बनेगा। जो शिष्य गुरु जी की सीढ़ी यानि भक्ति मार्ग  से उतर जाता है यानि गुरु जी द्वारा बताई भक्ति छोड़ देता है, उसका नाम समाप्त हा जाता है। उसको काल घसीटकर ले जाएगा , उसको कोई नहीं छुड़वाएगा। Sat Xampal CZOnalaliay 11 SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Ji @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ कबीर, गुरु सीढ़ी से उतरे, शब्द बिहूना होय। ताको काल घसीटही, राख सकै ना कोय। | भावार्थ :- गुरु से नाम दीक्षा लेकर जो मर्यादा तोड़ देता है, वह अगले जन्म मैं भैंस के काटड़े के रूप में जन्म लेगा। जो गुरु जी से आडा-टेढ़ा (अशब्द) बौलता है, वह पशु बनेगा। जो शिष्य गुरु जी की सीढ़ी यानि भक्ति मार्ग  से उतर जाता है यानि गुरु जी द्वारा बताई भक्ति छोड़ देता है, उसका नाम समाप्त हा जाता है। उसको काल घसीटकर ले जाएगा , उसको कोई नहीं छुड़वाएगा। Sat Xampal CZOnalaliay 11 SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Ji @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ - ShareChat