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रुबाई सरमद #सूफी काव्य
सूफी काव्य - "रुबाई  ईं मुर्दुम एन्दुनिया ज़े ख़ुदा बे खबर अंद, हर शाम ओ सहर, दर तलब ए सीम ओ ज़र अंद | पहलू एन्हमदिगर, जिगर रेश तर 3 अंद, हर चंद कि चूं बाद-ए॰सबा दर गुज़र अंद | हैं अहल-एन्जहाँ बेख़बर ए राज़ ए ख़ुदा है शाम ओ सहर ग़म उन्हें सीम ओ-ज़र का रुकते ही नहीं उनके लड़ाई झगड़े हर-चंद गुज़र जाऐंगे सब সিলে-৭-মনা (सरमद) Motivational Videos Appi Want . "रुबाई  ईं मुर्दुम एन्दुनिया ज़े ख़ुदा बे खबर अंद, हर शाम ओ सहर, दर तलब ए सीम ओ ज़र अंद | पहलू एन्हमदिगर, जिगर रेश तर 3 अंद, हर चंद कि चूं बाद-ए॰सबा दर गुज़र अंद | हैं अहल-एन्जहाँ बेख़बर ए राज़ ए ख़ुदा है शाम ओ सहर ग़म उन्हें सीम ओ-ज़र का रुकते ही नहीं उनके लड़ाई झगड़े हर-चंद गुज़र जाऐंगे सब সিলে-৭-মনা (सरमद) Motivational Videos Appi Want . - ShareChat