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#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - पढ़ो बाबू , पढ़ो किताब का एक एक अक्षर पढ़ो देश का इतिहास फिर से गढ़ो। इतिहास के आँसू टपक रहे  तुम किस जाल में भटक रहे देश को संवरने दो , अपने वादों के चक्कर से कभी न बिखरने दो दुश्मन की छाती को तोड़ दो उसके हौसलों को मरोड़ दो जनकवि राजेन्द्र कुमार निराला पढ़ो बाबू , पढ़ो किताब का एक एक अक्षर पढ़ो देश का इतिहास फिर से गढ़ो। इतिहास के आँसू टपक रहे  तुम किस जाल में भटक रहे देश को संवरने दो , अपने वादों के चक्कर से कभी न बिखरने दो दुश्मन की छाती को तोड़ दो उसके हौसलों को मरोड़ दो जनकवि राजेन्द्र कुमार निराला - ShareChat