Rajendra Kumar Nirala
ShareChat
click to see wallet page
@343648615
343648615
Rajendra Kumar Nirala
@343648615
मुझ ShareChat पर फॉलो करें!
जनकवि राजेन्द्र कुमार निराला #राजेन्द्र कुमार निराला की कविताएं #📚कविता-कहानी संग्रह
राजेन्द्र कुमार निराला की कविताएं - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - साहित्य सेवा , देश सेवा , समर्पित है मेरे भावों का मेवा सत्य की डगर पकड़़ो , अज्ञानता में न जकड़ो चिंता की क्या बात ? जब मेरी रचना तेरे पथ का है एक संतुलित कलेवा फिर कैसे ? ग्रसित हो सड़ी गली सोचों से g जानलेवा ৯ তী মনী ক जनकवि राजेन्द्र कुमार निराला साहित्य सेवा , देश सेवा , समर्पित है मेरे भावों का मेवा सत्य की डगर पकड़़ो , अज्ञानता में न जकड़ो चिंता की क्या बात ? जब मेरी रचना तेरे पथ का है एक संतुलित कलेवा फिर कैसे ? ग्रसित हो सड़ी गली सोचों से g जानलेवा ৯ তী মনী ক जनकवि राजेन्द्र कुमार निराला - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - पढ़ो बाबू , पढ़ो किताब का एक एक अक्षर पढ़ो देश का इतिहास फिर से गढ़ो। इतिहास के आँसू टपक रहे  तुम किस जाल में भटक रहे देश को संवरने दो , अपने वादों के चक्कर से कभी न बिखरने दो दुश्मन की छाती को तोड़ दो उसके हौसलों को मरोड़ दो जनकवि राजेन्द्र कुमार निराला पढ़ो बाबू , पढ़ो किताब का एक एक अक्षर पढ़ो देश का इतिहास फिर से गढ़ो। इतिहास के आँसू टपक रहे  तुम किस जाल में भटक रहे देश को संवरने दो , अपने वादों के चक्कर से कभी न बिखरने दो दुश्मन की छाती को तोड़ दो उसके हौसलों को मरोड़ दो जनकवि राजेन्द्र कुमार निराला - ShareChat
सारी देवी -देवियाँ एक ओर , मेरी माँ एक ओर । #❤️ Love You Maa ❤️
❤️ Love You Maa ❤️ - B:०० RMO 4G Illtu 0 Bijendra Rajbandhu Yesterday 10.26 pm Gallery Contacts Phone आज मेरी माँ का साया उठ गया, जिंदगी का आगन सूना सूना हो गया। Reply B:०० RMO 4G Illtu 0 Bijendra Rajbandhu Yesterday 10.26 pm Gallery Contacts Phone आज मेरी माँ का साया उठ गया, जिंदगी का आगन सूना सूना हो गया। Reply - ShareChat
Today is my birthday dated on 4 January. #🎉बर्थडे पार्टी डेकोरेशन
🎉बर्थडे पार्टी डेकोरेशन - ShareChat
दिनकर #📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - तेरे विचार के तार अधिक जितना चढ़ सके चढ़ाता चल। पथ और नया खुल सकता है आगे को पांव बढ़ाता चल।। तेरे विचार के तार अधिक जितना चढ़ सके चढ़ाता चल। पथ और नया खुल सकता है आगे को पांव बढ़ाता चल।। - ShareChat