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☝ मेरे विचार - सिंधी समाज ने मनाया स्वामी पुरसनाराम साहिब का १९३वां जन्मोत्सव, जयपुर कै बाहर भीआए श्रद्धालु  ३३१ महिलाओं ने निकाली कलश यात्रा , १९३ पाउंड का केक काटा इनसाइडस्टीरी भास्कर न्यूज | जयपुर सिंधी समाज ने रविवार को महाशिवरात्रि पर १९३ वर्ष पूर्व पहले शिवरात्रि के दिन सिंध जवाहर नगर में संत सद्गुरु स्वामी पुरसनाराम  में हथूंगे नामक स्थान पर स्वामी पुरसना राम  हुआ। इसके पोछे कथा प्रचलित है साहिब का १९३वां जन्मोत्सव मनाया। इससे muಗ धर्म कि ३६ महीने माता के गर्भ में रहे और जब पहल CT फहनाकर Brd शुभारंभ किया। इसके बाद दोपहर में ३३१ लिया ता उनके कान छिदे हुए थे। १२ नन्म महिलाओं ने गजराज की अगुवाई में गाजे- बबूल के पेड़ पर तपस्या की थी।  साल तक बाजे के साथ मँगल कलश यात्रा निकाली। इस पेड़ के कांटे जब साधकों को चुभने सेक्टर 4 जवाहर नगर के स्वामी पुरसनाराम  लगे तो उन्होने बबूल को आदेश किया और  HfBஎ பF आयोजन   हुए। बबूल के कांटे झड गए। साईं पुरसनाराम आयाजन को पुष्प, लाल रंग ध्वजों से सजाया शाम को भजनों से संतों का गुणगानः गाकर कर संगत को रिझाया। रात में १९३ पाउंड 6 साहिब ने जब महसूस किया कि इस धरती भजन संध्या हुई जिसमें कलाकार का शाकाहारी केक काटकर जन्मोत्सव मनाया।  शुभारंभ प्रातः पुरसनाराम गया। कार्यक्रम का शाम को पर उनका जीवन का उद्देश्य अब पूर्ण हुआ  कटनी साहिब मंडल के अध्यक्ष साईं मुकेश साध ने दिलीप उदासी तो उन्होने पूर्व में ही शरीर त्यागने की घोषणा  इसके बाद पल्लव प्रार्थना एवं महाआरती का गोरधन उदासी TTC धर्म ध्वजा फहराकर किया। इस दौरान वेद भक्त एवं सूफियाना सुरों से आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद  कर दीथी। चिक्रम संवत १९६४ में समाधि मध्यप्रदश ) श्रद्धालुअों ने एवं भंडारे की व्यवस्था भी की। इस अवसर मंत्रोच्चार व जयघोष के बीच कर दिया। उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध  ली थी। इन्हें सिंधी लोग इन्हें समाज सुधारक भजन और लोकधुनों   पर पर अजमेर , जोधपुर, श्रीड्ूंगरगढ अहमदाबाद संत का स्मरण किया। कलश यात्रा के दौरान युग दृष्टा और संगत को पारंपरिक   सिंधी संत, आध्यात्मक होकर झूम उठे। वसी वसी का चित्र बग्गी में विराजमान था। भोपाल इंदौर, उज्जैन आगरा, कानपुर, दिल्ली से जोड़ने वाले योगी पुरुष के रूप  श्रद्धालु भाव विभोर महाराज भगवान पुष्प वर्षा की गई। दिल मेँ मूरत साईँ पुरसनाराम जी..जैसे भजन दुबई से भी श्रद्धालु आए। मार्ग में जगह जगह में पूजते हें। सिंधी समाज ने मनाया स्वामी पुरसनाराम साहिब का १९३वां जन्मोत्सव, जयपुर कै बाहर भीआए श्रद्धालु  ३३१ महिलाओं ने निकाली कलश यात्रा , १९३ पाउंड का केक काटा इनसाइडस्टीरी भास्कर न्यूज | जयपुर सिंधी समाज ने रविवार को महाशिवरात्रि पर १९३ वर्ष पूर्व पहले शिवरात्रि के दिन सिंध जवाहर नगर में संत सद्गुरु स्वामी पुरसनाराम  में हथूंगे नामक स्थान पर स्वामी पुरसना राम  हुआ। इसके पोछे कथा प्रचलित है साहिब का १९३वां जन्मोत्सव मनाया। इससे muಗ धर्म कि ३६ महीने माता के गर्भ में रहे और जब पहल CT फहनाकर Brd शुभारंभ किया। इसके बाद दोपहर में ३३१ लिया ता उनके कान छिदे हुए थे। १२ नन्म महिलाओं ने गजराज की अगुवाई में गाजे- बबूल के पेड़ पर तपस्या की थी।  साल तक बाजे के साथ मँगल कलश यात्रा निकाली। इस पेड़ के कांटे जब साधकों को चुभने सेक्टर 4 जवाहर नगर के स्वामी पुरसनाराम  लगे तो उन्होने बबूल को आदेश किया और  HfBஎ பF आयोजन   हुए। बबूल के कांटे झड गए। साईं पुरसनाराम आयाजन को पुष्प, लाल रंग ध्वजों से सजाया शाम को भजनों से संतों का गुणगानः गाकर कर संगत को रिझाया। रात में १९३ पाउंड 6 साहिब ने जब महसूस किया कि इस धरती भजन संध्या हुई जिसमें कलाकार का शाकाहारी केक काटकर जन्मोत्सव मनाया।  शुभारंभ प्रातः पुरसनाराम गया। कार्यक्रम का शाम को पर उनका जीवन का उद्देश्य अब पूर्ण हुआ  कटनी साहिब मंडल के अध्यक्ष साईं मुकेश साध ने दिलीप उदासी तो उन्होने पूर्व में ही शरीर त्यागने की घोषणा  इसके बाद पल्लव प्रार्थना एवं महाआरती का गोरधन उदासी TTC धर्म ध्वजा फहराकर किया। इस दौरान वेद भक्त एवं सूफियाना सुरों से आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद  कर दीथी। चिक्रम संवत १९६४ में समाधि मध्यप्रदश ) श्रद्धालुअों ने एवं भंडारे की व्यवस्था भी की। इस अवसर मंत्रोच्चार व जयघोष के बीच कर दिया। उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध  ली थी। इन्हें सिंधी लोग इन्हें समाज सुधारक भजन और लोकधुनों   पर पर अजमेर , जोधपुर, श्रीड्ूंगरगढ अहमदाबाद संत का स्मरण किया। कलश यात्रा के दौरान युग दृष्टा और संगत को पारंपरिक   सिंधी संत, आध्यात्मक होकर झूम उठे। वसी वसी का चित्र बग्गी में विराजमान था। भोपाल इंदौर, उज्जैन आगरा, कानपुर, दिल्ली से जोड़ने वाले योगी पुरुष के रूप  श्रद्धालु भाव विभोर महाराज भगवान पुष्प वर्षा की गई। दिल मेँ मूरत साईँ पुरसनाराम जी..जैसे भजन दुबई से भी श्रद्धालु आए। मार्ग में जगह जगह में पूजते हें। - ShareChat