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#❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈
❤️जीवन की सीख - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' प्रियजनों के बीच में जो स्नेह सम्मान भरा हुआ होता है और जो सहयोगी के रूप में विकसित होता है वह सर्वतोमुखी प्रगति बनाता है-उसी को मित्रता याप्रेम कहना चाहिए। देखें कि क्या हम अपनी आत्मीयता को सार्थक बनाने के लिए संपर्क क्षेत्र के रिस्तेदारों के साथ सुखन्दुख की भावनाओं का समर्थन करते हैं कि नहीं ? यदि नहीं तो उस भूल का परिमार्जन चालू करना चाहिए अन्यथा उस संपर्क का मूल्य ही बाजारू बन जाएगा। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' प्रियजनों के बीच में जो स्नेह सम्मान भरा हुआ होता है और जो सहयोगी के रूप में विकसित होता है वह सर्वतोमुखी प्रगति बनाता है-उसी को मित्रता याप्रेम कहना चाहिए। देखें कि क्या हम अपनी आत्मीयता को सार्थक बनाने के लिए संपर्क क्षेत्र के रिस्तेदारों के साथ सुखन्दुख की भावनाओं का समर्थन करते हैं कि नहीं ? यदि नहीं तो उस भूल का परिमार्जन चालू करना चाहिए अन्यथा उस संपर्क का मूल्य ही बाजारू बन जाएगा। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat