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##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - हरि शरणं मुक होइ बाचाल पंगु चढइ गिरिबर गहन जासु कृपाँ सो दयाल द्रवउ सकल कलि मल दहन जिनकी कृपा से गूंगा बोलने लगता है और लंगड़ा दुर्गम पर्वत को पार कर जाता है, वे दयालु प्रभु मुझ पर द्रवित हों। जीवन में जब आत्मविश्वास की कमी हो और जब रास्ते बंद दिख रहे हों, तब यह चौपाई आत्मबल देती है। हरि शरणं मुक होइ बाचाल पंगु चढइ गिरिबर गहन जासु कृपाँ सो दयाल द्रवउ सकल कलि मल दहन जिनकी कृपा से गूंगा बोलने लगता है और लंगड़ा दुर्गम पर्वत को पार कर जाता है, वे दयालु प्रभु मुझ पर द्रवित हों। जीवन में जब आत्मविश्वास की कमी हो और जब रास्ते बंद दिख रहे हों, तब यह चौपाई आत्मबल देती है। - ShareChat