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#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - हीरे को फेंककर जो कांच उठाने जाता है, उसके हाथ अंत में सिर्फ जख्म और उम्र भरका गहरे पछतावा ही लगता है। हीरे को फेंककर जो कांच उठाने जाता है, उसके हाथ अंत में सिर्फ जख्म और उम्र भरका गहरे पछतावा ही लगता है। - ShareChat