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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - कितने दिलों को तोड़ती हे कमबख्त फरवरी , र्यूँ ही नहीं किसी ने इसके दिन घटाए होंगे. Gulzar Ke Word कितने दिलों को तोड़ती हे कमबख्त फरवरी , र्यूँ ही नहीं किसी ने इसके दिन घटाए होंगे. Gulzar Ke Word - ShareChat