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।। ॐ ।। तत्र तं बुद्धिसंयोगं लभते पौर्वदेहिकम्। यतते च ततो भूयः संसिद्धौ कुरुनन्दन।। वहाँ वह पूर्वशरीर में साधन किये हुए बुद्धि के संयोग को अर्थात् पूर्वजन्म के साधन-संस्कारों को अनायास ही प्राप्त हो जाता है और हे कुरुनन्दन ! उसके प्रभाव से वह फिर 'संसिद्धौ' -भगवत्प्राप्तिरूपी परमसिद्धि के निमित्त प्रयत्न करने लगता है। #यथार्थ गीता #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गीता ज्ञान🛕
यथार्थ गीता - 13ು | बुद्धिसंयोगं लभते पौर्वदेहिकम्।  तत्रत भूयः संसिद्धौ कुरुनन्दन।।  यतते च ননা पूर्वशरीर में साधन किये हुए बुद्धि के = নচাঁ নচ संयोग को अर्थात् पूर्वजन्म के साधन संस्कारों  को अनायास ही प्राप्त हो जाता है और हे फिर उसके प्रभाव से वह कुरुनन्दन 'संसिद्धौ - भगवत्प्राप्तिरूपी परमसिद्धि के निमित्त प्रयत्न करने लगता है। 13ು | बुद्धिसंयोगं लभते पौर्वदेहिकम्।  तत्रत भूयः संसिद्धौ कुरुनन्दन।।  यतते च ননা पूर्वशरीर में साधन किये हुए बुद्धि के = নচাঁ নচ संयोग को अर्थात् पूर्वजन्म के साधन संस्कारों  को अनायास ही प्राप्त हो जाता है और हे फिर उसके प्रभाव से वह कुरुनन्दन 'संसिद्धौ - भगवत्प्राप्तिरूपी परमसिद्धि के निमित्त प्रयत्न करने लगता है। - ShareChat