ShareChat
click to see wallet page
search
*प्रोपेगंडा फ़िल्में क्या होती हैं, इसकी एक झलक देखिए।* 2000 में लाल क़िले पर हमला होता है। 2001 में संसद और अमरनाथ यात्रा पर आतंकवादी हमले होते हैं। 2002 में दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर पर हमला होता है। 2003 में मुंबई में बम विस्फोट होते हैं। *पूरे देश में इन घटनाओं को लेकर गुस्सा और आक्रोश है। ऐसे समय 2004 में फिल्म **“मैं हूँ ना”** *आती है। फिल्म में यह दिखाने की कोशिश की जाती है कि असली दुश्मन पाकिस्तान या जिहादी आतंकवादी नहीं, बल्कि सेना के कुछ कट्टर और पुराने सोच वाले अधिकारी हैं, जो हिंदू-मुस्लिम भाईचारे से चिढ़ते हैं और शांति प्रक्रिया को बिगाड़ते हैं।* इसके बाद भी घटनाएँ जारी रहती हैं— 2005 में दिल्ली में बम धमाके होते हैं। 2006 में काशी और मुंबई लोकल ट्रेन में विस्फोट होते हैं। 2007 में समझौता एक्सप्रेस और हैदराबाद में बम धमाके होते हैं। 2008 में दिल्ली, जयपुर और अहमदाबाद में बम विस्फोट होते हैं। *उसी दौर में फिल्म * *“माय नेम इज़ खान”** *आती है, जिसमें यह संदेश दिया जाता है कि लोगों का गुस्सा इसलिए है क्योंकि “खान” उपनाम वाले लोगों को दुनिया गलत तरीके से आतंकवादी समझती है और उनके साथ भेदभाव करती है।* इसी सूची में **“हैदर”**, **“फना”** जैसी फिल्मों बनाई गई इन फिल्मों में बताया जाता है लोग आतंकवाद की ओर सेना की कार्रवाई या राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़ते है इनका धर्म, जिहाद, आजाद कश्मीर या पाकिस्तान से कोई रिश्ता नहीं है ! *जागरूक बनिए और अपनी सुरक्षा के लिए बेहतर सरकार के साथ-साथ खुद को भी मजबूत कीजिए।* शत्रुबोध को जगाए। दुष्प्रचार से सावधान रहे। अपने असली नायकों को पहचाने। कट्टर सनातनी बने। *अपने देश में शांति से रहना है तो ये सब करना ही एकमात्र विकल्प है।* 🇮🇳🇮🇱🔱🪓⚔️🕉️✅🚩🇮🇳🇮🇱🔱🪓⚔️🕉️✅🚩🇮🇳🇮🇱🔱🪓⚔️🕉️✅🚩🇮🇳🇮🇱🔱🪓⚔️🕉️✅🚩🇮🇳🇮🇱🔱🪓⚔️🕉️✅🚩🇮🇳🇮🇱🔱🪓⚔️🕉️✅🚩🕉️🇮🇱🇮🇳 #मेरे विचार👈 #🚩मोदी फैन 🚩 #🙏PM मोदी के फैन 🇮🇳