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comment - {೯೯ ' दुनिया तरकेलोगीमिलेंग - अलग सोच अलग संरूकार अलगा ऊर्जा। ओरसच यही हकि हर्म इन्हीं सबके बीच अपना जीवन जीना हे। लेकिन एक बात बहुत गहराई से समझने जैसी जहोँ शगावाान , गुरुमाराशाहेब या अपने धर्म की हँसी उडाई ओरतुय जा रही हो चाहकर शी उसा माहाल को बदल न पा रहे हो॰ बहों खड़े रहना भी धीरे धीरे अंदर से तुरम्हे कमज़ोर करता हे। हर लडाई जवाब देकर नहीं जीती जातीः कुछ जगर्हों पर चुपचाप निकल जाना ही सबसे बड़ा उत्तर होता हे। कर्योकि argument अवसर अहंकार को बढ़ाता हेःपर आत्मा को थका ননাট भगवान ने केवलज्ञान के बाद जो बचन दिएचो किसी बहस के लिए नहीं बल्कि आत्मा को जगाने के लिए थे। गुरुमाराशाहेव उसी मार्गपर चलने की साधना कररहे ह। हम सब अभी भी मान कषाय, राग द्वेद में उलद्े हुए साधारण लोग ह - रसलिए परिवार आरसमाज रम अच्छाई भी भिलेगी आरकमी भी। लेकिन अगर किसी जगर negativity इतनी ज्यादा हो जाए श्रद्ध।को हिलाने लगे FT#u  airl Far' ' 367? ' gori लगे, तो। दों रुफाना समझदारी नहीं ह। मन बढुता कोमल होता हे। जिस संग र्े हम बेठते हः वेसी ही शीतर सााच धीरे धीरे उतरने लगती हे। इसलिए संग का चुनाव करना स्वार्थ नहीं, आत्म रक्षा हैे। धर्म बड़ी मुश्किल से मिलता हेः अनगिनत जन्मों के बाद ऐसी समझ जागती हे। उसे बचाकर हमारी जिम्मेदारी हे। कभी कभी लोगो जगरहों ओर I माहाल का त्याग़ करना भागना नही होता =चो अपने भीतर की रखने का निर्णय होता हे। रोशनी को सुरक्षित आखिर में इंसान चर्ही शांति पाता हे जहो उसका विश्वास हो। इसलिए हर जगह खुद को साबित करने की सुरक्षित जरूरत नहीं। जहों श्रद्धा का सम्मान न हो॰ चहोंसे सम्मान के साथ हट जाना ही बेहतर हे। क्योकि सबसे बड़ी जीत बाहरकी बहस नढीं अंदरकी शांति ह। {೯೯ ' दुनिया तरकेलोगीमिलेंग - अलग सोच अलग संरूकार अलगा ऊर्जा। ओरसच यही हकि हर्म इन्हीं सबके बीच अपना जीवन जीना हे। लेकिन एक बात बहुत गहराई से समझने जैसी जहोँ शगावाान , गुरुमाराशाहेब या अपने धर्म की हँसी उडाई ओरतुय जा रही हो चाहकर शी उसा माहाल को बदल न पा रहे हो॰ बहों खड़े रहना भी धीरे धीरे अंदर से तुरम्हे कमज़ोर करता हे। हर लडाई जवाब देकर नहीं जीती जातीः कुछ जगर्हों पर चुपचाप निकल जाना ही सबसे बड़ा उत्तर होता हे। कर्योकि argument अवसर अहंकार को बढ़ाता हेःपर आत्मा को थका ননাট भगवान ने केवलज्ञान के बाद जो बचन दिएचो किसी बहस के लिए नहीं बल्कि आत्मा को जगाने के लिए थे। गुरुमाराशाहेव उसी मार्गपर चलने की साधना कररहे ह। हम सब अभी भी मान कषाय, राग द्वेद में उलद्े हुए साधारण लोग ह - रसलिए परिवार आरसमाज रम अच्छाई भी भिलेगी आरकमी भी। लेकिन अगर किसी जगर negativity इतनी ज्यादा हो जाए श्रद्ध।को हिलाने लगे FT#u  airl Far' ' 367? ' gori लगे, तो। दों रुफाना समझदारी नहीं ह। मन बढुता कोमल होता हे। जिस संग र्े हम बेठते हः वेसी ही शीतर सााच धीरे धीरे उतरने लगती हे। इसलिए संग का चुनाव करना स्वार्थ नहीं, आत्म रक्षा हैे। धर्म बड़ी मुश्किल से मिलता हेः अनगिनत जन्मों के बाद ऐसी समझ जागती हे। उसे बचाकर हमारी जिम्मेदारी हे। कभी कभी लोगो जगरहों ओर I माहाल का त्याग़ करना भागना नही होता =चो अपने भीतर की रखने का निर्णय होता हे। रोशनी को सुरक्षित आखिर में इंसान चर्ही शांति पाता हे जहो उसका विश्वास हो। इसलिए हर जगह खुद को साबित करने की सुरक्षित जरूरत नहीं। जहों श्रद्धा का सम्मान न हो॰ चहोंसे सम्मान के साथ हट जाना ही बेहतर हे। क्योकि सबसे बड़ी जीत बाहरकी बहस नढीं अंदरकी शांति ह। - ShareChat