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#Eek Tu Hi Guru Ji
Eek Tu Hi Guru Ji - @ೂ पुत्तर परमात्मा कण ्कण में व्याप्त है। परमात्मा को Tu লিত' कहीं बाहर जाने की आवश्यकता खोजने के' नहीं है, बल्कि अपनी दृष्टि को बदलने की आवश्यकता है। परमात्मा का निवास निर्मल मन में Hi होता है। जब तक हृदय काम , क्रोध , लोभ और अहंकार जैसे विकारों से मुक्त नहीं होता, तब तक Tu उस अनंत की अनुभूति संभव नहीं है। जब परमात्मा निराकार है, तो केवल वस्त्र बदलने , तिलक लगाने Guu या शारीरिक प्रदर्शन करने से उसकी प्राप्ति नहीं हो सकती| परमात्मा तक पहुँचने का सबसे सुगम मार्ग Ji माना गया है "जिन प्रेम किओ तिन ही प्रभ पायो।" ] नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय। ] @ೂ पुत्तर परमात्मा कण ्कण में व्याप्त है। परमात्मा को Tu লিত' कहीं बाहर जाने की आवश्यकता खोजने के' नहीं है, बल्कि अपनी दृष्टि को बदलने की आवश्यकता है। परमात्मा का निवास निर्मल मन में Hi होता है। जब तक हृदय काम , क्रोध , लोभ और अहंकार जैसे विकारों से मुक्त नहीं होता, तब तक Tu उस अनंत की अनुभूति संभव नहीं है। जब परमात्मा निराकार है, तो केवल वस्त्र बदलने , तिलक लगाने Guu या शारीरिक प्रदर्शन करने से उसकी प्राप्ति नहीं हो सकती| परमात्मा तक पहुँचने का सबसे सुगम मार्ग Ji माना गया है "जिन प्रेम किओ तिन ही प्रभ पायो।" ] नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय। ] - ShareChat