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होलिका दहन होलिका दहन, हिन्दुओं का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें होली के एक दिन पहले यानी पूर्व सन्ध्या को होलिका का सांकेतिक रूप से दहन किया जाता है। होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व के रूप में मनाया जाता है। होलिका दहन होलिका दहन, होली त्योहार का पहला दिन, फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसके अगले दिन रंगों से खेलने की परंपरा है जिसे धुलेंडी, धुलंडी और धूलि आदि नामों से भी जाना जाता है। होली बुराई पर अच्छाई की विजय के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। होलिका दहन (जिसे छोटी होली भी कहते हैं) के अगले दिन पूर्ण हर्षोल्लास के साथ रंग खेलने का विधान है और अबीर-गुलाल आदि एक-दूसरे को लगाकर व गले मिलकर इस पर्व को मनाया जाता है। होली का त्योहार भारतवर्ष में अतिप्राचीन काल से मनाया जाता आ रहा है। इतिहास की दृष्टि से देखें तो यह वैदिक काल से मनाया जाता आ रहा है। हिन्दू मास के अनुसार होली के दिन से नए संवत की शुरुआत होती है। चैत्र कृष्ण प्रतिप्रदा के दिन धरती पर प्रथम मानव मनु का जन्म हुआ था। इसी दिन कामदेव का पुनर्जन्म हुआ था। इन सभी खुशियों को व्यक्त करने के लिए रंगोत्सव मनाया जाता है। इसके अलावा हुडदंग और रंगोत्सव का यह भी कारण बताया जाता है कि नृसिंह रूप में भगवान इसी दिन प्रकट हुए थे और हिरण्यकश्य नामक महाअसुर का वध कर भक्त प्रह्लाद को दर्शन दिए थे। दोल जात्रा या दोल उत्सव बंगाल में होली से एक दिन पहले मनाया जाता है। डोलजात्रा बांग्ला मास के पन्द्रहवें दिन - फाल्गुन को मनाया जाता है। डोलजात्रा पूर्णिमा का त्योहार है। इस दिन महिलाएँ लाल किनारी वाली पारंपरिक सफ़ेद साड़ी पहन कर शंख बजाते हुए राधा-कृष्ण की पूजा करती हैं और प्रभात-फेरी (सुबह निकलने वाला जुलूस) का आयोजन करती हैं। इसमें गाजे-बाजे के साथ, कीर्तन और गीत गाए जाते हैं। दोल शब्द का मतलब झूला होता है। झूले पर राधा-कृष्ण की मूर्ति रख कर महिलाएँ भक्ति गीत गाती हैं और उनकी पूजा करती है। इस दिन अबीर और रंगों से होली खेली जाती है। इस दोल यात्रा में चैतन्य महाप्रभु द्वारा रचित कृष्ण-भक्ति संगीत की प्रचुरता रहती है। प्राचीन काल में इस अवसर पर ज़मीदारों की हवेलियों के सिंहद्वार आम लोगों के लिए खोल दिये जाते थे। उन हवेलियों में राधा-कृष्ण के मंदिर में पूजा-अर्चना और भोज चलता रहता था। किंतु समय के साथ इस परंपरा में बदलाव आया है। #शुभ कामनाएँ 🙏
शुभ कामनाएँ 🙏 - ३ मार्च २०२६ ENA ೦ IclqR HOLI LARNMORE` जिस तरह होलिका जलकर हो गई थी राख उसी तरह आपके जीवन के मिट जाए सारे कष्ट और पाप. B೪೯ಖಣಞಣದ u ತರವೆ अन्याय व अधर्म पर भक्ति व सत्य की जीत का संदेश देने वाले पावन त्यौहार ಕಣಾ 557 ಹudust शमकामनाएं App rideos Want Motivationat ३ मार्च २०२६ ENA ೦ IclqR HOLI LARNMORE` जिस तरह होलिका जलकर हो गई थी राख उसी तरह आपके जीवन के मिट जाए सारे कष्ट और पाप. B೪೯ಖಣಞಣದ u ತರವೆ अन्याय व अधर्म पर भक्ति व सत्य की जीत का संदेश देने वाले पावन त्यौहार ಕಣಾ 557 ಹudust शमकामनाएं App rideos Want Motivationat - ShareChat