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नारद जी युधिष्ठिर को अपने पूर्व जन्म का वृतांत सुनाते हुए कहते हैं कि - पूर्वजन्म में इससे पहले के महाकल्प मै एक गन्धर्व था और नाम उपबर्हण था। मेरी सुन्दरता, सुकुमारता और मधुरता अपूर्व थी। एक बार देवताओं के यहां संतो का आना हुआ। उसमें भगवान की लीलाओं का गान करने के लिए मुझे बुलाया गया। ये जानते हुए भी कि संतो के बीच भगवान की लीला का गान होता है मैने स्त्रियों के साथ लौकिक गीतों का गान शुरू कर दिया। इससे संत लोग नाराज हो गए और मुझे शूद्र होने का श्राप दिया। उनके श्राप के कारण में एक दासी का पुत्र हुआ। उस जन्म में मैने संतो की सेवा की और उनके आशीष से इस जन्म के ब्रह्माजी का पुत्र हुआ हूं। संतो की अवहेलना और सेवा का यह मेरा प्रत्यक्ष अनुभव है। श्रीमद्भागवत-महापुराण/७/१५/६९-७४ श्रीमद्भागवत-महापुराण/7/15/69-74 #bhavishypuran #vedpuran #puranam #puranikyatra #mbapanditji #upanishads #shrimadbhagwat #shrimadbhagwatkatha #bhagwatkatha #bhagwat #bhagwatkathalive #भागवत #भागवतकथा #श्रीमद्भगवद्गीता #PuranikYatra #MBAPanditJi
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