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माँ ब्रह्मचारिणी #पूजन विधि
पूजन विधि - ब्रह्मचारिणी ಗ gu चमेली ப- देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः Il प्रार्थना दधाना कर पद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू प्रसीदतु 7 मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा  देवी या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता  नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः IlI IAH वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम् जपमाला कमण्डलु धरा ब्रह्मचारिणी शुभाम् II गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम् धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालङ्कार भूषिताम् परम वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोला पीन पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम् II स्तोत्रम् तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्। ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम् Il शङ्करप्रिया त्वंहि भुक्ति मुक्ति दायिनी । शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम् कवचम् पातु ललाटे पातु शङ्करभामिनी " 424q त्रिपुरा अर्पण सदापातु नेत्रो, अर्धरी च कपोलो पञ्चदशी कण्ठे पातु मध्यदेशे पातु महेश्वरी II षोडशी सदापातु नाभो गृहो च पादयो। अङ्ग प्रत्यङ्ग सतत पातु ब्रह्मचारिणी आरती সম্মনাহিতী সানা चतुरानन प्रिय सुख दाता जय अम्बे जय सभी को सिखलाती हो Il ब्रह्मा जी के मन भाती हो ज्ञान ब्रह्म मन्त्र है जाप तुम्हारा जिसको जपे सरल संसारा Il जो जन जिस दिन तुम्हें ध्याता যামন্সী নব ক্ষী সানা जय कमी कोई रहने ना पाये। कोई भी दुःख सहने न पाये Il उसकी विरति रहे ठिकाने | जो तेरी महिमा को जाने I। श्रद्धा दे कर II  रद्रक्षा की माला ले कर| जपे जो मन्त्र आलस छोड़ करे गुणगाना | माँ तुम उसको सुख पहुँचाना ब्रह्मचारिणी तेरो नाम | पूर्ण करो सब मेरे काम Il रखना लाज मेरी महतारी II भक्त तेरे चरणों का पुजारी  ब्रह्मचारिणी ಗ gu चमेली ப- देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः Il प्रार्थना दधाना कर पद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू प्रसीदतु 7 मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा  देवी या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता  नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः IlI IAH वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम् जपमाला कमण्डलु धरा ब्रह्मचारिणी शुभाम् II गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम् धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालङ्कार भूषिताम् परम वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोला पीन पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम् II स्तोत्रम् तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्। ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम् Il शङ्करप्रिया त्वंहि भुक्ति मुक्ति दायिनी । शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम् कवचम् पातु ललाटे पातु शङ्करभामिनी " 424q त्रिपुरा अर्पण सदापातु नेत्रो, अर्धरी च कपोलो पञ्चदशी कण्ठे पातु मध्यदेशे पातु महेश्वरी II षोडशी सदापातु नाभो गृहो च पादयो। अङ्ग प्रत्यङ्ग सतत पातु ब्रह्मचारिणी आरती সম্মনাহিতী সানা चतुरानन प्रिय सुख दाता जय अम्बे जय सभी को सिखलाती हो Il ब्रह्मा जी के मन भाती हो ज्ञान ब्रह्म मन्त्र है जाप तुम्हारा जिसको जपे सरल संसारा Il जो जन जिस दिन तुम्हें ध्याता যামন্সী নব ক্ষী সানা जय कमी कोई रहने ना पाये। कोई भी दुःख सहने न पाये Il उसकी विरति रहे ठिकाने | जो तेरी महिमा को जाने I। श्रद्धा दे कर II  रद्रक्षा की माला ले कर| जपे जो मन्त्र आलस छोड़ करे गुणगाना | माँ तुम उसको सुख पहुँचाना ब्रह्मचारिणी तेरो नाम | पूर्ण करो सब मेरे काम Il रखना लाज मेरी महतारी II भक्त तेरे चरणों का पुजारी - ShareChat