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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - 708 सरहदों पर इल्जाम है बेवजह बंटवारे का... लोग मुद्दतों से एक घर में भी अलग रहते है..!! 708 सरहदों पर इल्जाम है बेवजह बंटवारे का... लोग मुद्दतों से एक घर में भी अलग रहते है..!! - ShareChat