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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - भगवान के भरोसे की नींव होतो कभी डगमगाएंगे नहीं जिसमें नींव न हो, ऐसे भवन को हवा महल कहेंगे। कुछ लोग जीवन भर हवा महल ही बनाते हैं। अगर बचपन की नींव कमजोर हा तो जवानी हवा महल ही होगी। लेकिन ऐसा भी कहते हैं कि भक्त लोग हवा महल बनाते हैं क्योँकि उनकी नींव भगवान बनाते हैं। इसे भगवान के प्रति भरोसा कहते हैं। हमारे यहां शास्त्रों में सत्य की गरिमा को स्थापित करने লিং के उसके साथ नारायण को जोड़ दिया है। यानी ईश्वर और सत्य- कलियुग में लोगों ने इसी फॉर्मूले को उलटा कर लगभग एक स्वरूप हैं। दिया। लोगों ने सत्य की ताकत बढ़ाने के লিব नारायण को जोड़ा पुराने तो नए लोगों ने नारायण को असत्य के साथ ்g जोड़ ٩٢١ यदि आप भक्त हैं तो इस कलियुग में नींव भगवान के भरोसे की रखना , भवन कभी हवा महल नहीं बनेगा। आज केवल कर्मकांड ही भक्ति नहीं है। किताब पढ़ना, डायरी लिखना, मन को रोकना यानी मेडिटेशन और तन को ठोकना यानी योगासन, यह सब करते हुए भक्तिभाव बनाए रखिए तो इस कठिन समय में भी हमारा हवा महल ईश्वर के भरोसे की नींव के कारण हवा में डगमगाएगा नहीं। च Facebook:Pt Vijayshankar Mehta भगवान के भरोसे की नींव होतो कभी डगमगाएंगे नहीं जिसमें नींव न हो, ऐसे भवन को हवा महल कहेंगे। कुछ लोग जीवन भर हवा महल ही बनाते हैं। अगर बचपन की नींव कमजोर हा तो जवानी हवा महल ही होगी। लेकिन ऐसा भी कहते हैं कि भक्त लोग हवा महल बनाते हैं क्योँकि उनकी नींव भगवान बनाते हैं। इसे भगवान के प्रति भरोसा कहते हैं। हमारे यहां शास्त्रों में सत्य की गरिमा को स्थापित करने লিং के उसके साथ नारायण को जोड़ दिया है। यानी ईश्वर और सत्य- कलियुग में लोगों ने इसी फॉर्मूले को उलटा कर लगभग एक स्वरूप हैं। दिया। लोगों ने सत्य की ताकत बढ़ाने के লিব नारायण को जोड़ा पुराने तो नए लोगों ने नारायण को असत्य के साथ ்g जोड़ ٩٢١ यदि आप भक्त हैं तो इस कलियुग में नींव भगवान के भरोसे की रखना , भवन कभी हवा महल नहीं बनेगा। आज केवल कर्मकांड ही भक्ति नहीं है। किताब पढ़ना, डायरी लिखना, मन को रोकना यानी मेडिटेशन और तन को ठोकना यानी योगासन, यह सब करते हुए भक्तिभाव बनाए रखिए तो इस कठिन समय में भी हमारा हवा महल ईश्वर के भरोसे की नींव के कारण हवा में डगमगाएगा नहीं। च Facebook:Pt Vijayshankar Mehta - ShareChat