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#राधे राधे चन्द सो आनन कंचन-सौ तन, हौं लखि कैं बिनमोल बिकानी। औ अरविन्द-सी आँखिन कों "हठी" देखत मेरियै आँखि सिरानी॥ राजति हैं मनमोहन के संग वारौं मैं कोटि रमारति बानी। जीवनमूरि सबैं ब्रज की, ठकुरानी हमारी है राधिका रानी॥ श्री हठी जी श्री राधा के मुख कमल की आभा, चंद्र के समान है एवं उनके अंग का वर्ण, स्वर्ण के समान है, जिसके दर्शन मात्र से मैं बिना किसी मोल के बिक गया हूँ। जब मैं उनके नेत्र कमलों की तरफ दृष्टि करता हूँ तो मेरे नेत्र पलक गिराना भूल जाते हैं। जब श्री राधा मनमोहन के संग विराजती हैं तो इस छवी पर मैं कोटि कोटि लक्ष्मी एवं रति को वार दूँ। श्री राधा ठकुरानी समस्त ब्रजमण्डल के निवासियों की जीवन प्राण संजीवनी है एवं मेरी महारानी है..
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