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#पूजन विधि
पूजन विधि - नृसिंह द्वादशी व्रत कथा नृसिंह द्वादशी व्रत के फल से राजा वत्स को राज्य प्राप्ति की कथा  ऋषि दुर्वासा कहते हैं - "हे महामुने! नृसिंह द्वादशी त्रत् करने पर एक राजा को जो फल प्राप्त मैं वर्णन  हूँ, तुम ध्यानपूर्वक श्रवण करो | किम्पुरुषवर्ष में एक हुआ था, उसका कर रहा राजा भारत को एक पुत्ररत्न की प्राप्ति सुप्रसिद्ध राजा शासन करते थे जिनका  नाम भारत था अपने पुत्र " हुयी थी, जिसका नाम वत्स था समय आने पर भारत ने राज्य का उत्तरदायित्व वत्स को सौंपकर उन्हें राजा वत्स के रूप में प्रतिष्ठित किया कालान्तर में किसी भीषण राजा वत्स अपने से पराजित गये तथा उनका शत्रुओं युद्ध में वैभव, सम्पदा आदि सर्वस्व के अधीन से परास्त होकर राजा T शत्रुओं शत्रुओं 774, अपनी धर्मपत्नी सहित पैदल ही वन की ओर चल दिये तथा वहाँ पहुँचकर ऋषि वशिष्ठ के आश्रम में निवास करने लगे इस प्रकार आश्रम में निवास करते राजा को कुछ दिवस व्यतीत होे गये। वशिष्ठ ने राजा से पूछा 'हे राजन्! अपने राज्य आदिको त्यागकर इस आश्रम में एक दिन मुनि निवास करने का तुम्हारा क्या प्रयोजन तुम किस कारणवश इस महान आश्रम में निवास कर रहे हो? ने मुझे युद्ध में पराजित कर  'हे मुनिवर! दुष्ट मेरा राज्य एवं मुझसे राजा शत्रुओं कहा राजकोष आदि सर्वस्व छीन लिया है। इसीलिये असहाय होकर मैं आपकी शरण में आया हूँ आप अपने आशीर्वचनों द्वारा मेरे चित्त को शीतलता प्रदान करने की कृपा करें ।" कहते हैं - "हे मुने! राजा वत्स के इस प्रकार निवेदन करने पर वशिष्ठ मुनि ने राजा ऋषि ளH निर्देशानुसार को विधिवत् नृसिंह व्रत करने का उपदेश दिया राजा ने वसिष्ठ मुनि के द्वादशी हुये भगवान नृसिंह उस राजा पर अत्यन्त प्रसन्न व्रत का पालन किया जिसके प्रभाव द्वादशी जो युद्धभूमि में भगवान नृसिंह ने वरदान स्वरूप राजा को एक ऐसा दिव्य चक्र प्रदान किया में सक्षम था। का नाश करने शत्रुओं समस्त उस दिव्य चक्र की सहायता से महाराज वत्स ने समस्त को पराजित कर अपना राज्य शत्रुओं सिंहासन पर आसीन होकर उस धर्मात्मा राजा पुनः प्राप्त कर लिया एक सहस्र राज्य पुण्य कर्मों के प्रभाव अन्त समय में वह राजा भगवान विष्णु के अश्वमेध यज्ञ सम्पन्न किये परम धाम को प्राप्त हुआ हे मुने! सम्पूर्ण पातकों का नाश करने वाली यह नृसिंह द्वादशी धन्य है নিরামা হাল तुम्हारी करने हेतु मैंने इसका वर्णन कर दिया है इस व्रत के माहात्म्य का श्रवण करने के उपरान्त अपनी इच्छानुसार आचरण करो ।" श्रीवराहपुराण में वर्णित नृसिंह द्वादशी माहात्म्य सम्पूर्ण होता है Il  ।इस प्रकार नृसिंह द्वादशी व्रत कथा नृसिंह द्वादशी व्रत के फल से राजा वत्स को राज्य प्राप्ति की कथा  ऋषि दुर्वासा कहते हैं - "हे महामुने! नृसिंह द्वादशी त्रत् करने पर एक राजा को जो फल प्राप्त मैं वर्णन  हूँ, तुम ध्यानपूर्वक श्रवण करो | किम्पुरुषवर्ष में एक हुआ था, उसका कर रहा राजा भारत को एक पुत्ररत्न की प्राप्ति सुप्रसिद्ध राजा शासन करते थे जिनका  नाम भारत था अपने पुत्र " हुयी थी, जिसका नाम वत्स था समय आने पर भारत ने राज्य का उत्तरदायित्व वत्स को सौंपकर उन्हें राजा वत्स के रूप में प्रतिष्ठित किया कालान्तर में किसी भीषण राजा वत्स अपने से पराजित गये तथा उनका शत्रुओं युद्ध में वैभव, सम्पदा आदि सर्वस्व के अधीन से परास्त होकर राजा T शत्रुओं शत्रुओं 774, अपनी धर्मपत्नी सहित पैदल ही वन की ओर चल दिये तथा वहाँ पहुँचकर ऋषि वशिष्ठ के आश्रम में निवास करने लगे इस प्रकार आश्रम में निवास करते राजा को कुछ दिवस व्यतीत होे गये। वशिष्ठ ने राजा से पूछा 'हे राजन्! अपने राज्य आदिको त्यागकर इस आश्रम में एक दिन मुनि निवास करने का तुम्हारा क्या प्रयोजन तुम किस कारणवश इस महान आश्रम में निवास कर रहे हो? ने मुझे युद्ध में पराजित कर  'हे मुनिवर! दुष्ट मेरा राज्य एवं मुझसे राजा शत्रुओं कहा राजकोष आदि सर्वस्व छीन लिया है। इसीलिये असहाय होकर मैं आपकी शरण में आया हूँ आप अपने आशीर्वचनों द्वारा मेरे चित्त को शीतलता प्रदान करने की कृपा करें ।" कहते हैं - "हे मुने! राजा वत्स के इस प्रकार निवेदन करने पर वशिष्ठ मुनि ने राजा ऋषि ளH निर्देशानुसार को विधिवत् नृसिंह व्रत करने का उपदेश दिया राजा ने वसिष्ठ मुनि के द्वादशी हुये भगवान नृसिंह उस राजा पर अत्यन्त प्रसन्न व्रत का पालन किया जिसके प्रभाव द्वादशी जो युद्धभूमि में भगवान नृसिंह ने वरदान स्वरूप राजा को एक ऐसा दिव्य चक्र प्रदान किया में सक्षम था। का नाश करने शत्रुओं समस्त उस दिव्य चक्र की सहायता से महाराज वत्स ने समस्त को पराजित कर अपना राज्य शत्रुओं सिंहासन पर आसीन होकर उस धर्मात्मा राजा पुनः प्राप्त कर लिया एक सहस्र राज्य पुण्य कर्मों के प्रभाव अन्त समय में वह राजा भगवान विष्णु के अश्वमेध यज्ञ सम्पन्न किये परम धाम को प्राप्त हुआ हे मुने! सम्पूर्ण पातकों का नाश करने वाली यह नृसिंह द्वादशी धन्य है নিরামা হাল तुम्हारी करने हेतु मैंने इसका वर्णन कर दिया है इस व्रत के माहात्म्य का श्रवण करने के उपरान्त अपनी इच्छानुसार आचरण करो ।" श्रीवराहपुराण में वर्णित नृसिंह द्वादशी माहात्म्य सम्पूर्ण होता है Il  ।इस प्रकार - ShareChat