प्रेम हमारा शाश्वत है, जैसे आदि-अनंत सनातन,
शाश्वती नाम तुम्हारा, जैसे सृष्टि का पावन अभिनंदन।
मैं विजय, हूँ पूर्ण तुमसे, यह मेरा जीवन अर्पण है,
तुम आधार हो इस कुटुंब का, तुम ही मेरी भक्ति हो।
विक्रम संवत का यह सूरज, नई रश्मियाँ लाया है,
चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा ने, नव-श्रृंगार सजाया है।
जैसे प्रकृति खिलती है, नई कोपलों की मुस्कान लिए,
वैसा ही हर्ष रहे जीवन में, माँ शक्ति का वरदान लिए।
तुमसे ही घर आँगन महके, तुमसे ही पूर्ण ये जीवन है,
नव वर्ष की मंगल बेला में, तुमको सादर अर्पण है।
तुम ही मेरी शक्ति हो, मेरे कर्मों का शुभ फल तुम,
इस पावन बेला में, विजय की बस तुम ही हो साथी।
शाश्वती, तुम्हें यह नव संवत्सर मंगलमय और सुखकारी हो,
ईश्वर की असीम अनुकंपा, हम पर सदा भारी हो।
"मेरी सहचरी, शाश्वती, और हमारे जीवन के हर एक विजय की गवाह। आपको और हमारे पूरे परिवार को सनातन नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ! ईश्वर हमारा साथ ऐसे ही बनाए रखे। 🚩🙏💖" #विजय पाल #📖 कविता और कोट्स✒️ #✍मेरे पसंदीदा लेखक #💞Heart touching शायरी✍️ ##️⃣DilShayarana💘


