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#कहो कैसे हो?
कहो कैसे हो? - लौट रहा हूँ मैं अतीत से देखूँ प्रथम तुम्हारे तेवर मेरे समय! कहो कैसे हो? शोरन्शराबा चीख पुकारे सड़कें भीर दुकानें होटल लेकिन गायक दर्द नहीं है केवल बह्ुत है  सब सामान हूँ मैं अगेय  लौट रहा सोचा तुमसे मिलता जाऊँ गीत! कहो कैसे हो? भवन और भवनों के जंगल चढ़ते औरउतरते ज़ीने यहाँ आदमी कहाँ मिलेगा सिर्फ मशीनें और मशीनें लौट र्हा हूँ मैं यथार्थ  मन हो आया तुम्हे भेंट लूँ मेरे स्वप्न! कहो कैसे हो? की एकं नस्ल मनुज की चली मिटाती यह लावे नदी की आतंक न पूछो खबरदार बीसवीं सदी తత लौट रहा हूँ मैं विदेश से सबसे पहले कुशल पूँछ लूँ मेरे देश! कहो कैसे हो? सह सभ्यता नुमाइश जैसे लोग नहीं है यसर्फ मुखौटे ठीक मनुष्य नहीं है कोई कद से ऊँचे मन से छोटे लौट रद्रा डँ मैं जंगल से लौट रहा हूँ मैं अतीत से देखूँ प्रथम तुम्हारे तेवर मेरे समय! कहो कैसे हो? शोरन्शराबा चीख पुकारे सड़कें भीर दुकानें होटल लेकिन गायक दर्द नहीं है केवल बह्ुत है  सब सामान हूँ मैं अगेय  लौट रहा सोचा तुमसे मिलता जाऊँ गीत! कहो कैसे हो? भवन और भवनों के जंगल चढ़ते औरउतरते ज़ीने यहाँ आदमी कहाँ मिलेगा सिर्फ मशीनें और मशीनें लौट र्हा हूँ मैं यथार्थ  मन हो आया तुम्हे भेंट लूँ मेरे स्वप्न! कहो कैसे हो? की एकं नस्ल मनुज की चली मिटाती यह लावे नदी की आतंक न पूछो खबरदार बीसवीं सदी తత लौट रहा हूँ मैं विदेश से सबसे पहले कुशल पूँछ लूँ मेरे देश! कहो कैसे हो? सह सभ्यता नुमाइश जैसे लोग नहीं है यसर्फ मुखौटे ठीक मनुष्य नहीं है कोई कद से ऊँचे मन से छोटे लौट रद्रा डँ मैं जंगल से - ShareChat