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#जय श्री राधे
गोपियों की मटकियाँ....
श्रीकृष्ण नित्य ही मथुरा माखन लेकर जाती हुयी गोपियों का माखन खा जाते हैं, और कंकड़ मार कर उनकी मटकियाँ भी फोड़ देते हैं।
श्रीकृष्ण के माखन खाने से तो गोपियों का मन खुश होता था परन्तु उनके मटकी फोड़ देने से वे बहुत चिन्तित हो जाती थीं,माखन तो वे अपने प्रेम से ही कान्हा के लिये तैयार किया करती थीं किन्तु मटकी तो दाम चुका कर मिलती थी।
एक बार सभी गोपियाँ एकत्र हो इस की शिकायत ले श्रीजी के समक्ष जा पहुँचीं। श्रीजी अपने प्रियतम के इस कृत्य को सुन अति-द्रवित हो उठीं, और श्रीकृष्ण से मान कर बैठीं।
जब श्रीकृष्ण को श्रीजी के मान का पता चला तोअति-विचलित हो उठे और अविलम्ब श्रीजी को मनाने के लिये उनके पास चल दिये। राह में उन्हें सखी चित्रा मिली उन्होंने उन्हें श्रीजी के मान का कारण बताया, तथा उनका मान समाप्त करने के लिये बताया कि आपने जितनी गोपियों की मटकियाँ फोड़ी हैं उनके बदले उन्हें एक की जगह दस मटकियाँ बनाकर देनी होगीं वह भी सुन्दर चित्रकारी के साथ।
श्रीजी को मान में देखना श्रीकृष्ण के लियै सम्भव नहीं होता इसलिये वे अविलम्ब श्रीजी का मान भंग करने के लिये सभी गोपियों की इच्छानुसार उसनी पसन्द की मटकियाँ बना कर देने लगे। जब सभी गोपियाँ की मटकियाँ बना दी तब जाकर श्रीजी का मान भंग हुआ।
राधे राधे....
जय श्रीकृष्ण....
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