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गुलज़ार शायरी ❤️ #शायरी ❤️
शायरी ❤️ - 66 ख्वाहिश ये मेरी नहीं की, 'तारीफ" हर कोई करे, कोशिश लेकिन है यही की, कोई बुरा भी ना कहे। =99 (0(( 66 ख्वाहिश ये मेरी नहीं की, 'तारीफ" हर कोई करे, कोशिश लेकिन है यही की, कोई बुरा भी ना कहे। =99 (0(( - ShareChat