ShareChat
click to see wallet page
search
#☝अनमोल ज्ञान #🙏गुरु महिमा😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏
☝अनमोल ज्ञान - Grapek मनुष्य जितने समय ' वर्तमान ' में रहता है , उतने ही समय वह अपना जीवन जीता है । | अच्छे चित्त की सामूहिकता में सदा ही चित्त ' सशक्त ' होता है । परम पूज्य श्री शिवकृपानंद स्वामीजी -श्री शिवकृपानंद स्वामीजी स्त्रोत : स्वामीजी का दैनिक संदेश 22/6/2020 The amount of time a human being remains in the ' present ' , for that much time only he lives his life . -Shree Shivkrupanand Swamiji प्रवचन के माध्यम से गुरुशक्तियों का प्रवाह ठंडे ठंडे चैतन्य के रूप में बहने लगता है , तब ' मन ' तो क्या , शरीर और सारा वातावरण ही ठंडा हो जाता है । ' माध्यम ' कल भी था , आज भी होता है और कल भी होगा । श्री शिवकृपानंद स्वामीजी हमारा चित्त जहां होता है वहीं से वैसी ही उर्जा जाने - अनजाने में हमसे ग्रहण होती ही रहती है । पूज्य बाबा स्वामी गुरुकार्य ( ३१ ) पूर्वजन्म के पुण्यकर्म बिना ' गुरुकार्य ' घटित होना संभव नहीं है । ( ३२ ) ' गुरुकार्य ' एक ऐसा कार्य है ; जो कोई भी नहीं कर सकता है । वह कार्य सदैव हो जाता है । ( ३३ ) जो कार्य किया है , वह गुरुकार्य नहीं है ; क्योंकि कार्य के साथ ' कर्ताभाव ' है । ( ३४ ) ' गुरुकार्य ' तो सदैव आत्मा और परमात्मा के बीच का ' सेतु ' है । ( ३५ ) ' गुरुकार्य अपने माध्यम से घटित होने पर एक दिव्य आनंद की ' अनुभूति ' होती है , जिसका वर्णन नहीं कमका - ShareChat