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#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - 3 -0 खैरात में मिली ख़ुशी मुझे अच्छी नहीं लगती ग़ालिब , मैं अपने दुखों में रहता हु नवावो की तरह। मिर्ज ग़ालिब अभ्युदय साहित्य 3 -0 खैरात में मिली ख़ुशी मुझे अच्छी नहीं लगती ग़ालिब , मैं अपने दुखों में रहता हु नवावो की तरह। मिर्ज ग़ालिब अभ्युदय साहित्य - ShareChat