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#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - अ ~Iட7- স ঢুপা লীনিত खामोशी की तह उलझनें क्योंकि , शोर कभी मुश्किलें आसान नहीं करता अभ्युदय साहित्य गुलज़ार अ ~Iட7- স ঢুপা লীনিত खामोशी की तह उलझनें क्योंकि , शोर कभी मुश्किलें आसान नहीं करता अभ्युदय साहित्य गुलज़ार - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - सब तरह की दीवानगी से वाकिफ हुए हम, पर मां जैसा चाहने वाला जमाने भर में ना था सब तरह की दीवानगी से वाकिफ हुए हम, पर मां जैसा चाहने वाला जमाने भर में ना था - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - गीत &्यज़ल सौ बार कहा दिल से, चल भूल भी जा उसको। हर बार कहा दिल ने, तुम दिल से नहीं कहते। | गीत &्यज़ल सौ बार कहा दिल से, चल भूल भी जा उसको। हर बार कहा दिल ने, तुम दिल से नहीं कहते। | - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - 6 लूटेंगे लोग तुझको बड़े इत्मिनान से, तेरे लहजे से शराफत झलकती है। गुलज़ार * * * 6 लूटेंगे लोग तुझको बड़े इत्मिनान से, तेरे लहजे से शराफत झलकती है। गुलज़ार * * * - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - सामान बाँध लिया है मैंने अब बताओ ग़ालिब... कहाँ रहते हैं वो लोग जो कहीं के नहीं रहते। मिर्ज़ा ग़ालिब ** * सामान बाँध लिया है मैंने अब बताओ ग़ालिब... कहाँ रहते हैं वो लोग जो कहीं के नहीं रहते। मिर्ज़ा ग़ालिब ** * - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - आज ढलती हुई शाम ने जब रंग बदला तो मुझे बदले हुए लोगों की बहुत याद आई आज ढलती हुई शाम ने जब रंग बदला तो मुझे बदले हुए लोगों की बहुत याद आई - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - तमन्नाओं से होते नहीं फ़ैसले मुकद्दर के कोशिशें लाख सही मगर.. तक़दीर भी इक चीज़ है..!! तमन्नाओं से होते नहीं फ़ैसले मुकद्दर के कोशिशें लाख सही मगर.. तक़दीर भी इक चीज़ है..!! - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - SrareChat Ram ख़ुदा से करो इश्क करना है तो হালিন, जुदाई T का ना ख़तरा बेवफ़ाई का SrareChat Ram ख़ुदा से करो इश्क करना है तो হালিন, जुदाई T का ना ख़तरा बेवफ़ाई का - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - जीवन राग्ट अपनी पीठ से निकले खंजरों को जब गिना मैंने ठीक उतने ही নিকল নিননী ক্ষী মল লমামা 21 जीवन संग्रह गुलजार जीवन राग्ट अपनी पीठ से निकले खंजरों को जब गिना मैंने ठीक उतने ही নিকল নিননী ক্ষী মল লমামা 21 जीवन संग्रह गुलजार - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - जब तक था दम में दम न दबे आसमां से हम | अब जब दम निकल गया तो ज़मीं ने दबा लिया, | जब तक था दम में दम न दबे आसमां से हम | अब जब दम निकल गया तो ज़मीं ने दबा लिया, | - ShareChat