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#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - 3 -0 खैरात में मिली ख़ुशी मुझे अच्छी नहीं लगती ग़ालिब , मैं अपने दुखों में रहता हु नवावो की तरह। मिर्ज ग़ालिब अभ्युदय साहित्य 3 -0 खैरात में मिली ख़ुशी मुझे अच्छी नहीं लगती ग़ालिब , मैं अपने दुखों में रहता हु नवावो की तरह। मिर्ज ग़ालिब अभ्युदय साहित्य - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - Best of kumar Vishwas @poetry_lovers6808 "जब थक जाओ दुनिया की महफिल से, तुम आवाज़ देना हम अक्सर अकेले ही रहते हैं... !!" Best of kumar Vishwas @poetry_lovers6808 "जब थक जाओ दुनिया की महफिल से, तुम आवाज़ देना हम अक्सर अकेले ही रहते हैं... !!" - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - मैं तो इस वास्ते चुप हूं कि तमाशा न बने और तू समझता है मुझे गिला कुछ भी नहीं ! dnt S K Shayari मैं तो इस वास्ते चुप हूं कि तमाशा न बने और तू समझता है मुझे गिला कुछ भी नहीं ! dnt S K Shayari - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - 3 -0 खैरात में मिली ख़ुशी मुझे अच्छी नहीं लगती ग़ालिब , मैं अपने दुखों में रहता हु नवावो की तरह। मिर्ज ग़ालिब अभ्युदय साहित्य 3 -0 खैरात में मिली ख़ुशी मुझे अच्छी नहीं लगती ग़ालिब , मैं अपने दुखों में रहता हु नवावो की तरह। मिर्ज ग़ालिब अभ्युदय साहित्य - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - 3 ~ICT-T समझने वाले तो ख़ामोशी भी समझ लेते है ना समझने वाले जज़्बातों का भी मज़ाक बना देते है। अभ्युदय साहित्य गुलज़ार : 3 ~ICT-T समझने वाले तो ख़ामोशी भी समझ लेते है ना समझने वाले जज़्बातों का भी मज़ाक बना देते है। अभ्युदय साहित्य गुलज़ार : - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - अ -- लोगो ने समझाया की वक्त बदलता है और वक्त ने समझाया की लोग भी बदलते है। अभ्युदय साहित्य गुलज़ार अ -- लोगो ने समझाया की वक्त बदलता है और वक्त ने समझाया की लोग भी बदलते है। अभ्युदय साहित्य गुलज़ार - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - ~ulu ficte +60091}9 शाम से आँख में नमी सी है आज फिर आप की कमी सी है Guol Rekilautg TleLegestIlledsie Ud Poeirl ~ulu ficte +60091}9 शाम से आँख में नमी सी है आज फिर आप की कमी सी है Guol Rekilautg TleLegestIlledsie Ud Poeirl - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - इससे पहले के कोई और उड़ा ले जाए जिसके हाथों से गिरे हैं वो उठा ले जाए इन दिनों देख मेरी जान मेरी आँखों में इतना पानी है के सब ख़ाब बहा ले जाए 42 के बिखरे हैं सो इसकी मर्ज़ी शाख़ ख़ुश्क़ पत्तों को जिधऱ चाहे हवा ले जाए इससे पहले के कोई और उड़ा ले जाए जिसके हाथों से गिरे हैं वो उठा ले जाए इन दिनों देख मेरी जान मेरी आँखों में इतना पानी है के सब ख़ाब बहा ले जाए 42 के बिखरे हैं सो इसकी मर्ज़ी शाख़ ख़ुश्क़ पत्तों को जिधऱ चाहे हवा ले जाए - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - अ ~Iட7- স ঢুপা লীনিত खामोशी की तह उलझनें क्योंकि , शोर कभी मुश्किलें आसान नहीं करता अभ्युदय साहित्य गुलज़ार अ ~Iட7- স ঢুপা লীনিত खामोशी की तह उलझनें क्योंकि , शोर कभी मुश्किलें आसान नहीं करता अभ्युदय साहित्य गुलज़ार - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - सब तरह की दीवानगी से वाकिफ हुए हम, पर मां जैसा चाहने वाला जमाने भर में ना था सब तरह की दीवानगी से वाकिफ हुए हम, पर मां जैसा चाहने वाला जमाने भर में ना था - ShareChat