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#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - 3 ~ICT-T समझने वाले तो ख़ामोशी भी समझ लेते है ना समझने वाले जज़्बातों का भी मज़ाक बना देते है। अभ्युदय साहित्य गुलज़ार : 3 ~ICT-T समझने वाले तो ख़ामोशी भी समझ लेते है ना समझने वाले जज़्बातों का भी मज़ाक बना देते है। अभ्युदय साहित्य गुलज़ार : - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - अ -- लोगो ने समझाया की वक्त बदलता है और वक्त ने समझाया की लोग भी बदलते है। अभ्युदय साहित्य गुलज़ार अ -- लोगो ने समझाया की वक्त बदलता है और वक्त ने समझाया की लोग भी बदलते है। अभ्युदय साहित्य गुलज़ार - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - ~ulu ficte +60091}9 शाम से आँख में नमी सी है आज फिर आप की कमी सी है Guol Rekilautg TleLegestIlledsie Ud Poeirl ~ulu ficte +60091}9 शाम से आँख में नमी सी है आज फिर आप की कमी सी है Guol Rekilautg TleLegestIlledsie Ud Poeirl - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - इससे पहले के कोई और उड़ा ले जाए जिसके हाथों से गिरे हैं वो उठा ले जाए इन दिनों देख मेरी जान मेरी आँखों में इतना पानी है के सब ख़ाब बहा ले जाए 42 के बिखरे हैं सो इसकी मर्ज़ी शाख़ ख़ुश्क़ पत्तों को जिधऱ चाहे हवा ले जाए इससे पहले के कोई और उड़ा ले जाए जिसके हाथों से गिरे हैं वो उठा ले जाए इन दिनों देख मेरी जान मेरी आँखों में इतना पानी है के सब ख़ाब बहा ले जाए 42 के बिखरे हैं सो इसकी मर्ज़ी शाख़ ख़ुश्क़ पत्तों को जिधऱ चाहे हवा ले जाए - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - अ ~Iட7- স ঢুপা লীনিত खामोशी की तह उलझनें क्योंकि , शोर कभी मुश्किलें आसान नहीं करता अभ्युदय साहित्य गुलज़ार अ ~Iட7- স ঢুপা লীনিত खामोशी की तह उलझनें क्योंकि , शोर कभी मुश्किलें आसान नहीं करता अभ्युदय साहित्य गुलज़ार - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - सब तरह की दीवानगी से वाकिफ हुए हम, पर मां जैसा चाहने वाला जमाने भर में ना था सब तरह की दीवानगी से वाकिफ हुए हम, पर मां जैसा चाहने वाला जमाने भर में ना था - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - गीत &्यज़ल सौ बार कहा दिल से, चल भूल भी जा उसको। हर बार कहा दिल ने, तुम दिल से नहीं कहते। | गीत &्यज़ल सौ बार कहा दिल से, चल भूल भी जा उसको। हर बार कहा दिल ने, तुम दिल से नहीं कहते। | - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - 6 लूटेंगे लोग तुझको बड़े इत्मिनान से, तेरे लहजे से शराफत झलकती है। गुलज़ार * * * 6 लूटेंगे लोग तुझको बड़े इत्मिनान से, तेरे लहजे से शराफत झलकती है। गुलज़ार * * * - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - सामान बाँध लिया है मैंने अब बताओ ग़ालिब... कहाँ रहते हैं वो लोग जो कहीं के नहीं रहते। मिर्ज़ा ग़ालिब ** * सामान बाँध लिया है मैंने अब बताओ ग़ालिब... कहाँ रहते हैं वो लोग जो कहीं के नहीं रहते। मिर्ज़ा ग़ालिब ** * - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - आज ढलती हुई शाम ने जब रंग बदला तो मुझे बदले हुए लोगों की बहुत याद आई आज ढलती हुई शाम ने जब रंग बदला तो मुझे बदले हुए लोगों की बहुत याद आई - ShareChat