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#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़- ए-गुफ़्तुगू क्या है Mushaiion Ki Dunia मिर्ज़ा ग़ालिब हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़- ए-गुफ़्तुगू क्या है Mushaiion Ki Dunia मिर्ज़ा ग़ालिब - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - जरूरत है कुछ नए नफरत करने वालों की लगे हैं मुझे। वाले अब पुराने चाहने जरूरत है कुछ नए नफरत करने वालों की लगे हैं मुझे। वाले अब पुराने चाहने - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - 6 लूटेंगे लोग तुझको बड़े इत्मिनान से, तेरे लहजे से शराफत झलकती है। गुलज़ार * * * 6 लूटेंगे लोग तुझको बड़े इत्मिनान से, तेरे लहजे से शराफत झलकती है। गुलज़ार * * * - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - 3 -0 खैरात में मिली ख़ुशी मुझे अच्छी नहीं लगती ग़ालिब , मैं अपने दुखों में रहता हु नवावो की तरह। मिर्ज ग़ालिब अभ्युदय साहित्य 3 -0 खैरात में मिली ख़ुशी मुझे अच्छी नहीं लगती ग़ालिब , मैं अपने दुखों में रहता हु नवावो की तरह। मिर्ज ग़ालिब अभ्युदय साहित्य - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - Best of kumar Vishwas @poetry_lovers6808 "जब थक जाओ दुनिया की महफिल से, तुम आवाज़ देना हम अक्सर अकेले ही रहते हैं... !!" Best of kumar Vishwas @poetry_lovers6808 "जब थक जाओ दुनिया की महफिल से, तुम आवाज़ देना हम अक्सर अकेले ही रहते हैं... !!" - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - मैं तो इस वास्ते चुप हूं कि तमाशा न बने और तू समझता है मुझे गिला कुछ भी नहीं ! dnt S K Shayari मैं तो इस वास्ते चुप हूं कि तमाशा न बने और तू समझता है मुझे गिला कुछ भी नहीं ! dnt S K Shayari - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - 3 ~ICT-T समझने वाले तो ख़ामोशी भी समझ लेते है ना समझने वाले जज़्बातों का भी मज़ाक बना देते है। अभ्युदय साहित्य गुलज़ार : 3 ~ICT-T समझने वाले तो ख़ामोशी भी समझ लेते है ना समझने वाले जज़्बातों का भी मज़ाक बना देते है। अभ्युदय साहित्य गुलज़ार : - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - अ -- लोगो ने समझाया की वक्त बदलता है और वक्त ने समझाया की लोग भी बदलते है। अभ्युदय साहित्य गुलज़ार अ -- लोगो ने समझाया की वक्त बदलता है और वक्त ने समझाया की लोग भी बदलते है। अभ्युदय साहित्य गुलज़ार - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - ~ulu ficte +60091}9 शाम से आँख में नमी सी है आज फिर आप की कमी सी है Guol Rekilautg TleLegestIlledsie Ud Poeirl ~ulu ficte +60091}9 शाम से आँख में नमी सी है आज फिर आप की कमी सी है Guol Rekilautg TleLegestIlledsie Ud Poeirl - ShareChat