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#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - मिर्ज़ा ग़ालिब इश्क़ के बाज़ार में खासारे का मेला रह गया भीड़ है लाखो की मगर दिल अकेला रह गया ग़ालिब दिखावा करने वाले ले गए मोहब्बत का ख़िताब शिद्दत से चाहने वाला हर इन्सान अकेला रह गया chano writer 67 मिर्ज़ा ग़ालिब इश्क़ के बाज़ार में खासारे का मेला रह गया भीड़ है लाखो की मगर दिल अकेला रह गया ग़ालिब दिखावा करने वाले ले गए मोहब्बत का ख़िताब शिद्दत से चाहने वाला हर इन्सान अकेला रह गया chano writer 67 - ShareChat