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#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - कहां तलाश करूं अपने जैसा गुनाहगार कोई, इस जहां में तो सबके सब फ़रिश्ते ही रहते हैं, कहां तलाश करूं अपने जैसा गुनाहगार कोई, इस जहां में तो सबके सब फ़रिश्ते ही रहते हैं, - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - MERE ALIAAT मेरे ठोकरें खाने से भी कुछ लोगों को जलन हैं... कहते हैं यूँ तो ये शख्स तजुर्बे में आगे निकल जाएगा...! मिर्ज़ा ग़ालिब | मेरे अल्फाज़ CC MERE ALIAAT मेरे ठोकरें खाने से भी कुछ लोगों को जलन हैं... कहते हैं यूँ तो ये शख्स तजुर्बे में आगे निकल जाएगा...! मिर्ज़ा ग़ालिब | मेरे अल्फाज़ CC - ShareChat
#बेहतरीन उर्दू शायरी✍️
बेहतरीन उर्दू शायरी✍️ - हमारे बा'द अब महफ़िल में अफ़्साने बयाँ होंगे बहारें हम को ढूँढेंगी न जाने हम कहाँ होंँगे Mushoiron Ki Dunid  چ٥١٥g मणरह हमारे बा'द अब महफ़िल में अफ़्साने बयाँ होंगे बहारें हम को ढूँढेंगी न जाने हम कहाँ होंँगे Mushoiron Ki Dunid  چ٥١٥g मणरह - ShareChat
#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - तकदीर बदल जाती है जब इरादे मजबूत हों. वरना जिंदगी कट जाती है किस्मत को दोष देने में.. !! तकदीर बदल जाती है जब इरादे मजबूत हों. वरना जिंदगी कट जाती है किस्मत को दोष देने में.. !! - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - इतना अमीर तो नहीं कि सब-कुछ ख़रीद सकूं ग़ालिब, मग़र इतना ग़रीब भी नहीं कि ख़ुद बिक जाऊं, इतना अमीर तो नहीं कि सब-कुछ ख़रीद सकूं ग़ालिब, मग़र इतना ग़रीब भी नहीं कि ख़ुद बिक जाऊं, - ShareChat
#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - बड़ा महंगा पड़ा औरों के लिए जिंदगी जीना "साहब' उम्र भी खर्च हुई और हाथ भी कुछ नहीं लगा .!! बड़ा महंगा पड़ा औरों के लिए जिंदगी जीना "साहब' उम्र भी खर्च हुई और हाथ भी कुछ नहीं लगा .!! - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - सौ बार तलाश किया हमनें ख़ुद को ख़ुद # एक तेरे सिवा कुछ न मिला gకTH मुझको सौ बार तलाश किया हमनें ख़ुद को ख़ुद # एक तेरे सिवा कुछ न मिला gకTH मुझको - ShareChat
#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - इशदा तो हमाशाु भी दूर तक जाने का था. मगर बीच रास्ते मेँ ही उनकी पसंद बदल गई...! इशदा तो हमाशाु भी दूर तक जाने का था. मगर बीच रास्ते मेँ ही उनकी पसंद बदल गई...! - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - पर्दा नशीन रहता नहीं कोई उम्र भर ग़ालिब , वक्त की रफ़्तार से उतरते हैं नक़ाब लोगो के, पर्दा नशीन रहता नहीं कोई उम्र भर ग़ालिब , वक्त की रफ़्तार से उतरते हैं नक़ाब लोगो के, - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - MENE ALTAAZ ज़िंदा जिस्म कि यहाँ कोई अहमियत नहीं 'ग़ालिब" मज़ार बन जाने दो मेले लगा करेंगे...! mirza ghalib MENE ALTAAZ ज़िंदा जिस्म कि यहाँ कोई अहमियत नहीं 'ग़ालिब" मज़ार बन जाने दो मेले लगा करेंगे...! mirza ghalib - ShareChat