「SคgͥeeͣrͫkђคŇ」
ShareChat
click to see wallet page
@sageerkhan01
sageerkhan01
「SคgͥeeͣrͫkђคŇ」
@sageerkhan01
मुझे ShareChat पर फॉलो करें!
#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - तकदीर बदल जाती है जब इरादे मजबूत हों. वरना जिंदगी कट जाती है किस्मत को दोष देने में.. !! तकदीर बदल जाती है जब इरादे मजबूत हों. वरना जिंदगी कट जाती है किस्मत को दोष देने में.. !! - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - इतना अमीर तो नहीं कि सब-कुछ ख़रीद सकूं ग़ालिब, मग़र इतना ग़रीब भी नहीं कि ख़ुद बिक जाऊं, इतना अमीर तो नहीं कि सब-कुछ ख़रीद सकूं ग़ालिब, मग़र इतना ग़रीब भी नहीं कि ख़ुद बिक जाऊं, - ShareChat
#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - बड़ा महंगा पड़ा औरों के लिए जिंदगी जीना "साहब' उम्र भी खर्च हुई और हाथ भी कुछ नहीं लगा .!! बड़ा महंगा पड़ा औरों के लिए जिंदगी जीना "साहब' उम्र भी खर्च हुई और हाथ भी कुछ नहीं लगा .!! - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - सौ बार तलाश किया हमनें ख़ुद को ख़ुद # एक तेरे सिवा कुछ न मिला gకTH मुझको सौ बार तलाश किया हमनें ख़ुद को ख़ुद # एक तेरे सिवा कुछ न मिला gకTH मुझको - ShareChat
#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - इशदा तो हमाशाु भी दूर तक जाने का था. मगर बीच रास्ते मेँ ही उनकी पसंद बदल गई...! इशदा तो हमाशाु भी दूर तक जाने का था. मगर बीच रास्ते मेँ ही उनकी पसंद बदल गई...! - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - पर्दा नशीन रहता नहीं कोई उम्र भर ग़ालिब , वक्त की रफ़्तार से उतरते हैं नक़ाब लोगो के, पर्दा नशीन रहता नहीं कोई उम्र भर ग़ालिब , वक्त की रफ़्तार से उतरते हैं नक़ाब लोगो के, - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - MENE ALTAAZ ज़िंदा जिस्म कि यहाँ कोई अहमियत नहीं 'ग़ालिब" मज़ार बन जाने दो मेले लगा करेंगे...! mirza ghalib MENE ALTAAZ ज़िंदा जिस्म कि यहाँ कोई अहमियत नहीं 'ग़ालिब" मज़ार बन जाने दो मेले लगा करेंगे...! mirza ghalib - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - पर्दा नशीन रहता नहीं कोई उम्र भर ग़ालिब , वक्त की रफ़्तार से उतरते हैं नक़ाब लोगो के, पर्दा नशीन रहता नहीं कोई उम्र भर ग़ालिब , वक्त की रफ़्तार से उतरते हैं नक़ाब लोगो के, - ShareChat
#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - मुक़द्दर में लिखा कर लाए हैं दर-ब- दर भटकना मौसम कोई भी हो परिंदे परेशान ही रहते हैं..!! मुक़द्दर में लिखा कर लाए हैं दर-ब- दर भटकना मौसम कोई भी हो परिंदे परेशान ही रहते हैं..!! - ShareChat
#✨गुड नाईट शायरी
✨गुड नाईट शायरी - अजीब दर्द का रिश्ता है सारी में दुनिया कहीं हो जलता मकान अपना है मुझे घर लगे मालिकज़ादा मंज़ूर अहमद ९ हिन्द् ज२न ్ अजीब दर्द का रिश्ता है सारी में दुनिया कहीं हो जलता मकान अपना है मुझे घर लगे मालिकज़ादा मंज़ूर अहमद ९ हिन्द् ज२न ్ - ShareChat