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#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - कहां तलाश करूं अपने जैसा गुनाहगार कोई, इस जहां में तो सबके सब फ़रिश्ते ही रहते हैं, कहां तलाश करूं अपने जैसा गुनाहगार कोई, इस जहां में तो सबके सब फ़रिश्ते ही रहते हैं, - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - 66 MERE ALFAAZ ठिकाना क़ब्र हैं. इबादत कुछ तो कर ग़ालिब Il कहावत हैं के... खाली हाथ किसी के घर जाया नहीं करते..! mere alfaaz mirza ghalib 66 MERE ALFAAZ ठिकाना क़ब्र हैं. इबादत कुछ तो कर ग़ालिब Il कहावत हैं के... खाली हाथ किसी के घर जाया नहीं करते..! mere alfaaz mirza ghalib - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - मुझे क़त्ल करना है तो खंजर से ग़ालिब, वारमत करना লিব  काफ़ी है तेरा ग़ैरों से # प्यार करना, मुझे क़त्ल करना है तो खंजर से ग़ालिब, वारमत करना লিব  काफ़ी है तेरा ग़ैरों से # प्यार करना, - ShareChat
#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - मुक़द्दर में लिखा कर लाए हैं दर-ब- दर भटकना मौसम कोई भी हो परिंदे परेशान ही रहते हैं..!! मुक़द्दर में लिखा कर लाए हैं दर-ब- दर भटकना मौसम कोई भी हो परिंदे परेशान ही रहते हैं..!! - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - हमें देख कर जब उन्होंने मुंह मोड़ লিমা; एक तसल्ली हो गई चलो पहचानते तो है हमें देख कर जब उन्होंने मुंह मोड़ লিমা; एक तसल्ली हो गई चलो पहचानते तो है - ShareChat
#✌️शुक्रवार शायरी✍️ #✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✌️शुक्रवार शायरी✍️ - मुक़द्दर में लिखा कर लाए हैं दर-ब- दर भटकना मौसम कोई भी हो परिंदे परेशान ही रहते हैं..!! मुक़द्दर में लिखा कर लाए हैं दर-ब- दर भटकना मौसम कोई भी हो परिंदे परेशान ही रहते हैं..!! - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - "हम न बदलेंगे वक्त की रफ्तार के साथ, भी मिलेंगे जव अंदाज पुराना होगा ! ಓ मिर्जा गालिब ~ "हम न बदलेंगे वक्त की रफ्तार के साथ, भी मिलेंगे जव अंदाज पुराना होगा ! ಓ मिर्जा गालिब ~ - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - 66 MERE NLfAAZ फ़क़त बाल रंगने से ग़ालिब " कुछ नहीं होता कुछ नादानियाँ.. भी किया करो जवान रहने के लिए मिर्ज़ा ग़ालिब mere alfaaz 66 MERE NLfAAZ फ़क़त बाल रंगने से ग़ालिब " कुछ नहीं होता कुछ नादानियाँ.. भी किया करो जवान रहने के लिए मिर्ज़ा ग़ालिब mere alfaaz - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - 66 MERE ALFAAZ ठिकाना क़ब्र हैं. इबादत कुछ तो कर ग़ालिब Il कहावत हैं के... खाली हाथ किसी के घर जाया नहीं करते..! mere alfaaz mirza ghalib 66 MERE ALFAAZ ठिकाना क़ब्र हैं. इबादत कुछ तो कर ग़ालिब Il कहावत हैं के... खाली हाथ किसी के घर जाया नहीं करते..! mere alfaaz mirza ghalib - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - भुला नहीं हूं, तुमको बस एहसास दिलाना छोड़ दिया , भुला नहीं हूं, तुमको बस एहसास दिलाना छोड़ दिया , - ShareChat