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#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - जरूरत है कुछ नए नफरत करने वालों की लगे हैं मुझे। वाले अब पुराने चाहने जरूरत है कुछ नए नफरत करने वालों की लगे हैं मुझे। वाले अब पुराने चाहने - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - वो खुली किताब थी और में ठहरा " अनपढ़ वो खुली किताब थी और में ठहरा " अनपढ़ - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - जीवन राग्ट अपनी पीठ से निकले खंजरों को जब गिना मैंने ठीक उतने ही নিকল নিননী ক্ষী মল লমামা 21 जीवन संग्रह गुलजार जीवन राग्ट अपनी पीठ से निकले खंजरों को जब गिना मैंने ठीक उतने ही নিকল নিননী ক্ষী মল লমামা 21 जीवन संग्रह गुलजार - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - खत्म हो रही है मेरी नादानियां में अब समझदार बन रहा हु कुछ ना, मिलने पर रोया करता था अब सब कुछ भी मुस्कुरा रहा हु! ! !... खोकर खत्म हो रही है मेरी नादानियां में अब समझदार बन रहा हु कुछ ना, मिलने पर रोया करता था अब सब कुछ भी मुस्कुरा रहा हु! ! !... खोकर - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - इजाज़त हो तो लिफ़ाफ़े में रखकर कुछ वक़्त भेज दूँ॰ सुना है कुछ लोगों को नहीं है अपनों से बात फुर्सत करने की। इजाज़त हो तो लिफ़ाफ़े में रखकर कुछ वक़्त भेज दूँ॰ सुना है कुछ लोगों को नहीं है अपनों से बात फुर्सत करने की। - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - जला जिस्म जहां दिल भी जल गया होगा, | कुरेदते हो जो राख़ अब जुस्तजू I8,1 जला जिस्म जहां दिल भी जल गया होगा, | कुरेदते हो जो राख़ अब जुस्तजू I8,1 - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - 3 ~ICT-T समझने वाले तो ख़ामोशी भी समझ लेते है ना समझने वाले जज़्बातों का भी मज़ाक बना देते है। अभ्युदय साहित्य गुलज़ार : 3 ~ICT-T समझने वाले तो ख़ामोशी भी समझ लेते है ना समझने वाले जज़्बातों का भी मज़ाक बना देते है। अभ्युदय साहित्य गुलज़ार : - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - 3 ~ICT-T समझने वाले तो ख़ामोशी भी समझ लेते है ना समझने वाले जज़्बातों का भी मज़ाक बना देते है। अभ्युदय साहित्य गुलज़ार : 3 ~ICT-T समझने वाले तो ख़ामोशी भी समझ लेते है ना समझने वाले जज़्बातों का भी मज़ाक बना देते है। अभ्युदय साहित्य गुलज़ार : - ShareChat
#👍स्पेशल शायरी🖋
👍स्पेशल शायरी🖋 - मुमकिन है हमें गाँव भी पहचान न पाए बचपन में ही हम घर से कमाने निकल आए MUNAWWAR RANA WL TIIL SUKHANWAR 05 मुमकिन है हमें गाँव भी पहचान न पाए बचपन में ही हम घर से कमाने निकल आए MUNAWWAR RANA WL TIIL SUKHANWAR 05 - ShareChat