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#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - @ghalib_ghazals जिंदगी उसकी जिस्की मौत पर जमाना अफसोस करे feq यूं तो हर शख्स़् आता है लिए॰॰॰॰ में मरने के इस दुनिया ग़ालिब @ghalib_ghazals जिंदगी उसकी जिस्की मौत पर जमाना अफसोस करे feq यूं तो हर शख्स़् आता है लिए॰॰॰॰ में मरने के इस दुनिया ग़ालिब - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - "हम न बदलेंगे वक्त की रफ्तार के साथ, भी मिलेंगे जव अंदाज पुराना होगा ! ಓ मिर्जा गालिब ~ "हम न बदलेंगे वक्त की रफ्तार के साथ, भी मिलेंगे जव अंदाज पुराना होगा ! ಓ मिर्जा गालिब ~ - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - वाक़िफ है हम दुनियां के रिवाज़ो से ग़ालिब जब दिल भर जाता है तो हर कोई भुला देता है, वाक़िफ है हम दुनियां के रिवाज़ो से ग़ालिब जब दिल भर जाता है तो हर कोई भुला देता है, - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - वाक़िफ है हम दुनियां के रिवाज़ो से ग़ालिब जब दिल भर जाता है तो हर कोई भुला देता है, वाक़िफ है हम दुनियां के रिवाज़ो से ग़ालिब जब दिल भर जाता है तो हर कोई भुला देता है, - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - सौ बार तलाश किया हमनें ख़ुद को ख़ुद # एक तेरे सिवा कुछ न मिला gకTH मुझको सौ बार तलाश किया हमनें ख़ुद को ख़ुद # एक तेरे सिवा कुछ न मिला gకTH मुझको - ShareChat
#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - "हम न बदलेंगे वक्त की रफ्तार के साथ, भी मिलेंगे जव अंदाज पुराना होगा ! ಓ मिर्जा गालिब ~ "हम न बदलेंगे वक्त की रफ्तार के साथ, भी मिलेंगे जव अंदाज पुराना होगा ! ಓ मिर्जा गालिब ~ - ShareChat
#👍स्पेशल शायरी🖋
👍स्पेशल शायरी🖋 - हाल ये है कि रोया जाए, मलाल ये है कि किसके लिए हाल ये है कि रोया जाए, मलाल ये है कि किसके लिए - ShareChat
#👍स्पेशल शायरी🖋
👍स्पेशल शायरी🖋 - हूँ ज़मीं हूँ मैं #@T कह दूँ कि आकाश मगर उसे तो खबर है कि कुछ नहीं हूँ मैं Mushoiron Ki Dunid रहत इंदौरी हूँ ज़मीं हूँ मैं #@T कह दूँ कि आकाश मगर उसे तो खबर है कि कुछ नहीं हूँ मैं Mushoiron Ki Dunid रहत इंदौरी - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - मैं तो इस वास्ते चुप हूं कि तमाशा न बने और तू समझता है मुझे गिला कुछ भी नहीं ! dnt S K Shayari मैं तो इस वास्ते चुप हूं कि तमाशा न बने और तू समझता है मुझे गिला कुछ भी नहीं ! dnt S K Shayari - ShareChat
#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - मैं तो इस वास्ते चुप हूं कि तमाशा न बने और तू समझता है मुझे गिला कुछ भी नहीं ! dnt S K Shayari मैं तो इस वास्ते चुप हूं कि तमाशा न बने और तू समझता है मुझे गिला कुछ भी नहीं ! dnt S K Shayari - ShareChat