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#मेरे विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख ##भगवद गीता🙏🕉️ #🙏 प्रेरणादायक विचार
मेरे विचार - चित्तमात्मन्येवावतिष्ठते । विनियतं ಶಷT निःस्पृहः सर्वकामेभ्यो युक्त इत्युच्यते तदा I। अत्यन्त वशमें किया हुआ चित्त जिस कालमें परमात्मामें ही भलीभाँति स्थित हा जाता है॰ उस कालमें सम्पूर्ण भोगोंसे स्पृहारहित पुरुप योगयुक्त है, ऐसा कहा जाता है Il १८ II यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता | योगिनो यतचित्तस्य युञ्जतो योगमात्मनः Il जिस प्रकार वायुरहित स्थानमें स्थित दोपक चलाय- मान नहीं होता, वैसी ही उपमा परमात्माके ध्यानमें लगे हुए योगीके जीते हुए चित्तको कही गयी है II १९ II योगसेवया यत्रोपरमते ಗ೯ಷೆ মিল यत्र चैवात्मनात्मानं पश्यन्नात्मनि तुष्यति १l योगके अभ्याससे निरुद्ध चित्त जिस अवस्थामें उपराम हाे जाता हैं और जिस अवस्थामें परमात्माके ध्यानसे शुद्ध हुई सूक्ष्म चुद्धिद्वारा परमात्माको साक्षात् करता हुआ  सच्चिदानन्दघन परमात्मामें ही सन्तुष्ट रहता हैं II २० Il श्रीमद्भगवद् गीता अध्याय 6 प्रेस , गोरखपूर से सामार गीता चित्तमात्मन्येवावतिष्ठते । विनियतं ಶಷT निःस्पृहः सर्वकामेभ्यो युक्त इत्युच्यते तदा I। अत्यन्त वशमें किया हुआ चित्त जिस कालमें परमात्मामें ही भलीभाँति स्थित हा जाता है॰ उस कालमें सम्पूर्ण भोगोंसे स्पृहारहित पुरुप योगयुक्त है, ऐसा कहा जाता है Il १८ II यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता | योगिनो यतचित्तस्य युञ्जतो योगमात्मनः Il जिस प्रकार वायुरहित स्थानमें स्थित दोपक चलाय- मान नहीं होता, वैसी ही उपमा परमात्माके ध्यानमें लगे हुए योगीके जीते हुए चित्तको कही गयी है II १९ II योगसेवया यत्रोपरमते ಗ೯ಷೆ মিল यत्र चैवात्मनात्मानं पश्यन्नात्मनि तुष्यति १l योगके अभ्याससे निरुद्ध चित्त जिस अवस्थामें उपराम हाे जाता हैं और जिस अवस्थामें परमात्माके ध्यानसे शुद्ध हुई सूक्ष्म चुद्धिद्वारा परमात्माको साक्षात् करता हुआ  सच्चिदानन्दघन परमात्मामें ही सन्तुष्ट रहता हैं II २० Il श्रीमद्भगवद् गीता अध्याय 6 प्रेस , गोरखपूर से सामार गीता - ShareChat