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#श्रीमद्भगवद् गीता #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख
श्रीमद्भगवद् गीता - ते तं भुक्त्वा स्वर्गलोकं विशालं- मर्त्यलोकं  विशन्ति। क्षीणे पुण्ये त्रयीधर्ममनुप्रपन्ना - एवं 747 II गतागतं कामकामा उस  विशाल स्वर्गलोकको भोगकर पुण्य ন क्षीण होनेपर मृत्युलोकको प्राप्त होते हैं " इस प्रकार स्वर्गके साधनरूप तीनों वेदोंमें कहे ஈன் लेनेवाले और सकामकर्मका 319 कामनावाले पुरुष बार-बार आवागमनको Tq होते हैं, अर्थात् प्रभावसे स्वर्गमें जाते हैँ पुण्यके और पुण्य क्षीण होनेपर मृत्युलोकमें आते हैँ II २१ II अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते। तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम् ।।  जो अनन्यप्रेमी भक्तजन मुझ परमेश्वरको निरन्तर चिन्तन करते हुए निष्कामभावसे भजते हैँ, उन नित्य-निरन्तर मेर चिन्तन करनेवाले पुरुपोंका योगक्षेम * मैँ स्वयं प्राप्त कर देता हूँ II २२ II भगवत्स्वरूपको प्राप्तिका नाम ` योग ' है और भगवत्प्राप्तिके निमित्त किये हए साधनकी रक्षाका क्षेम ' है। नाम श्रीमदभगवदगीता अध्याय 9 W; गोरखपुर से साभार যীলা ते तं भुक्त्वा स्वर्गलोकं विशालं- मर्त्यलोकं  विशन्ति। क्षीणे पुण्ये त्रयीधर्ममनुप्रपन्ना - एवं 747 II गतागतं कामकामा उस  विशाल स्वर्गलोकको भोगकर पुण्य ন क्षीण होनेपर मृत्युलोकको प्राप्त होते हैं " इस प्रकार स्वर्गके साधनरूप तीनों वेदोंमें कहे ஈன் लेनेवाले और सकामकर्मका 319 कामनावाले पुरुष बार-बार आवागमनको Tq होते हैं, अर्थात् प्रभावसे स्वर्गमें जाते हैँ पुण्यके और पुण्य क्षीण होनेपर मृत्युलोकमें आते हैँ II २१ II अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते। तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम् ।।  जो अनन्यप्रेमी भक्तजन मुझ परमेश्वरको निरन्तर चिन्तन करते हुए निष्कामभावसे भजते हैँ, उन नित्य-निरन्तर मेर चिन्तन करनेवाले पुरुपोंका योगक्षेम * मैँ स्वयं प्राप्त कर देता हूँ II २२ II भगवत्स्वरूपको प्राप्तिका नाम ` योग ' है और भगवत्प्राप्तिके निमित्त किये हए साधनकी रक्षाका क्षेम ' है। नाम श्रीमदभगवदगीता अध्याय 9 W; गोरखपुर से साभार যীলা - ShareChat