ShareChat
click to see wallet page
search
#✍️ अनसुनी शायरी #✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ अनसुनी शायरी - देखूँ तो हर भीड़ का हिस्सा हूँ, सोचूँ तो एक भी शख़्स मेरा नहीं!.. देखूँ तो हर भीड़ का हिस्सा हूँ, सोचूँ तो एक भी शख़्स मेरा नहीं!.. - ShareChat