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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - आखा जीवा विसरैमरिजाउय आखणि अउखा साचा नाचसाचे नामकी लागै भूख $ उतुभूखै खाइचलीअहि दूखाा हे भाई! मनुष्य अक्सर शरीर के चलने को ही जीवन मान मै तेरा लेते हैं असल में वह जीते ्जी मर जाने के समान है। जब अपने मूल को भूल जाता है, तो वह माया और इंसान भिखारी अहंकार के जाल में फंसकर दुखी होता रहता है।दुनियावी के बीच ईश्वर को याद रखना कठिन है।जब तक मन में [31 सुखों ' अहंकार रहता है तब तक सच्चा नाम हृदय में नहीं टिकता, जैसे शरीर को ऊर्जा के लिए भोजन चाहिए वैसे ही आत्मा পঙ্কাভা की तृप्ति के लिए नाम चाहिए। नाम की भूख आपके' दुखों वाले को खा जाती है। नाम के आनंद में व्यक्ति इतना सराबोर हो कि उसे दुनिया के दुख सुख में ही महसूस होने UIdT గే बाबा लगते हैं।परमात्मा का नाम कोई बाहरी कर्मकांड नहीं, बल्कि एक आंतरिक प्यास है। जब इंसान उस सत्य के साथ एकरूप हो जाता है, तो काल (मृत्यु) और माया (दुख) के बंधनों से मुक्त होकर सदा स्थिर आनंद को प्राप्त कर लेता 8 आखा जीवा विसरैमरिजाउय आखणि अउखा साचा नाचसाचे नामकी लागै भूख $ उतुभूखै खाइचलीअहि दूखाा हे भाई! मनुष्य अक्सर शरीर के चलने को ही जीवन मान मै तेरा लेते हैं असल में वह जीते ्जी मर जाने के समान है। जब अपने मूल को भूल जाता है, तो वह माया और इंसान भिखारी अहंकार के जाल में फंसकर दुखी होता रहता है।दुनियावी के बीच ईश्वर को याद रखना कठिन है।जब तक मन में [31 सुखों ' अहंकार रहता है तब तक सच्चा नाम हृदय में नहीं टिकता, जैसे शरीर को ऊर्जा के लिए भोजन चाहिए वैसे ही आत्मा পঙ্কাভা की तृप्ति के लिए नाम चाहिए। नाम की भूख आपके' दुखों वाले को खा जाती है। नाम के आनंद में व्यक्ति इतना सराबोर हो कि उसे दुनिया के दुख सुख में ही महसूस होने UIdT గే बाबा लगते हैं।परमात्मा का नाम कोई बाहरी कर्मकांड नहीं, बल्कि एक आंतरिक प्यास है। जब इंसान उस सत्य के साथ एकरूप हो जाता है, तो काल (मृत्यु) और माया (दुख) के बंधनों से मुक्त होकर सदा स्थिर आनंद को प्राप्त कर लेता 8 - ShareChat